आखिर क्या है 'काली खांसी', जिसने देश से विदेश तक के लोगो को करा है परेशान? 

इनदिनों मौसम बड़ी तेजी बदलता जा रहा है और गर्मी तोह बहुत ही जयदा बढ़ रही है। और इसी के साथ बीमारियों का खतरा भी बढ़ता चला जा रहा है। मौसम बदलने के साथ ही लोगों को सर्दी-खांसी-बुखार जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इस बार काली खांसी ने भी लोगों को काफी परेशान कर रखा है। काली खांसी यानि व्हूपिंग कफ या पर्टुसिस वो बीमारी है जिसका असर सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, फिलीपींस, नीदरलैंड, आयरलैंड जैसी जगहों पर भी हो रहा है। सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी यानि पीएचए ने बताया कि उत्तरी आयरलैंड में काली खांसी के मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है। 

काली खांसी क्या है
काली खांसी, या पर्टुसिस, एक श्वसन संक्रमण है जो खांसी के दौरों का कारण बन सकता है। गंभीर मामलों में, खांसी तीव्र और तेज़ हो सकती है। आपको इतनी जोर से खांसी हो सकती है कि आपको उल्टी हो सकती है । इस बीमारी का नाम खांसी के बाद सांस लेने की कोशिश करते समय निकलने वाली कर्कश आवाज के कारण पड़ा है।

काली खांसी का कारण क्या है
काली खांसी बोर्डेटेला पर्टुसिस नामक एक प्रकार के बैक्टीरिया के कारण होती है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। जिन लोगों को पर्टुसिस होता है, वे आम तौर पर किसी के बहुत करीब आकर खांसने, छींकने या सांस लेने से फैलते हैं। यह कभी-कभी किसी संक्रमित सतह को छूने और फिर अपनी नाक या मुंह को छूने से भी फैल सकता है।

क्या है इलाज
डॉक्टर इसके लिए एंटी-एलर्जिक या एंटीबायोटिक दवाई देते हैं।  इससे बचने का सबसे बेहतर तरीका वैक्सीनेशन है। छोटे बच्चों के लिए डीटीएपी मतलब डिप्थीरिया, टेटनस और पर्टुसिस और वयस्कों के लिए टीडीएपी यानि टेटनस, डिप्थीरिया और पर्टुसिस जैसे टीके इस बीमारी को रोकने में मददगार साबित हो सकते हैं। 

 

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