ओ.पी. राजभर ने ऐसा क्यों कहा 'बिना मंत्रीपद के भी जीतेंगे', राजभर जी मंत्रीपद छोड़ेंगे, तो करेंगे क्या?
यूपी में हाल ही में हुए उपचुनाव के दौरान, भाजपा के खेमें में आने वाले सुभासपा नेता ओमप्रकाश राजभर हमेशा अपने बयानों से चर्चा में बने रहते हैं। माना जा रहा था कि उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री का पद दिया जाएगा। इसको लेकर उन्होंने खुद भी कई बार बयान दिए हैं।
वहीं अब उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिपरिषद में शामिल किए जाने की अटकलों के बीच, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि, उनके लिए मंत्री पद ज्यादा महत्व नहीं रखता। दरअसल, ओमप्रकाश राजभर से भदोही में पत्रकारों ने सवाल किया। उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें मंत्री पद नहीं दिया गया, तो क्या वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ बने रहेंगे। इस पर राजभर ने कहा कि, याद रखें जब मैं समाजवादी पार्टी के साथ था, तो मैंने कहा था कि भले ही हमें एक भी सीट ना मिले, लेकिन हम सपा के साथ रहेंगे।
10 सितंबर को राजभर ने विश्वास जताया था कि घोसी विधानसभा उपचुनाव हारने वाले भाजपा के दारा सिंह चौहान के साथ उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बनाया जाएगा। उन्होंने 12 नवंबर को भी यही बात दोहराई। राजभर ने कहा कि मैंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से बात की थी। कुछ चीजें हैं, जो पहले से ही तय हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में हम राजग के साथ हैं। मंत्री पद हमारे लिए ज्यादा मायने नहीं रखता। यह केवल एक साधन है।
ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि, एक व्यक्ति जिसने समाज के हित के लिए मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, उसके लिए मंत्री पद का क्या महत्व है? उन्होंने कहा कि सुभासपा राज्य में विस्तार कर रही है और सभी 75 जिलों में सक्रिय है। सुभासपा ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में उत्तर प्रदेश में 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा और छह सीटें जीतीं थी। बाद में पार्टी ने राष्ट्रपति पद के लिए राजग उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन किया, जबकि समाजवादी पार्टी ने यशवंत सिन्हा का समर्थन किया था। इस साल जुलाई में सुभासपा औपचारिक रूप से राजग में शामिल हो गई।
फिलहाल उत्तर प्रदेश विधानसभा में सुभासपा के छह विधायक हैं। सुभासपा ने 2017 में भाजपा के साथ गठबंधन में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव लड़ा और चार सीटें जीतीं थी। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री के रूप में पहले कार्यकाल के दौरान राजभर को भी मंत्री बनाया गया था। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और सुभासपा की राहें अलग हो गई थीं। राजभर की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद जुलाई में सुभासपा फिर से राजग में लौट आई।
















































































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