आखिर कब है आषाढ़ अमावस्या? जाने पितरों को तर्पण देने के लाभ।
आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को आषाढ़ अमावस्या होती है। उस दिन सुबह में पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, उसके बाद दान करते हैं। आषाढ़ अमावस्या के दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पाप मिटते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन पितर पितृ लोक से पृथ्वी पर आते हैं और उम्मीद करते हैं कि अपने वंश से उनको तृप्त किया जाएगा। इस दिन किए गए तर्पण से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। माना जाता है कि अगर हमारे पितृ हम से प्रसन्न हों तो जीवन की कई कठिनाइयां दूर हो जाती हैं। वहीं पितृ अगर नाराज हों तो दिक्कतों का सामना आपको आजीवन करना पड़ सकता है। इसलिए हर माह पितरों की आत्मा की शांति के लिए और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अमावस्या तिथि पर दान और तर्पण करना शुभ होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस समय आषाढ़ का महीना चल रहा है। इस महीने में आने वाली अमावस्या को आषाढ़ अमावस्या के नाम से जाना जाता है।
किस दिन है आषाढ़ अमावस्या 2024?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल 5 जुलाई दिन शुक्रवार को प्रात: 04 बजकर 57 मिनट से आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि शुरू होगी। यह तिथि अगले दिन 6 जुलाई शनिवार को प्रात: 04 बजकर 26 मिनट पर खत्म होगी। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर आषाढ़ अमावस्या का पावन पर्व 5 जुलाई शुक्रवार को होगा।
आषाढ़ अमावस्या पर पितरों को तर्पण देने के लाभ
* आषाढ़ अमावस्या के दिन पितरों को जल, कुश, तिल और फूल से सुबह के समय तर्पण देते हैं तो, पितरों के आशीर्वाद से आपके कार्य बनने लग जाते हैं।
* इस दिन पितरों का ध्यान करते हुए आपको दान करने से भी शुभ फलों की प्राप्ति होती है। दान स्वरूप इस दिन आप अन्न, वस्त्र धन इत्यादि दे सकते हैं।
* संभव हो तो इस दिन पितरों के निमित्त आपको व्रत भी रखना चाहिए, ऐसा करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है।
* आषाढ़ अमावस्या के दिन आपको पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। माना जाता है कि पीपल के वृक्ष में पितृ निवास करते हैं।
* पितरों के प्रति जितना सम्मान और श्रद्धा आप अमावस्या तिथि के दिन दिखाते हैं उतना ही आपके जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
















































































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