बुलडोजर में बन रही सब्जी और मिक्सर मशीन में मालपुआ, देखने को मिला नया अजूबा।
एक तरफ जेसीबी की मदद से सब्जी तैयार की जा रही है, दूसरी तरफ सीमेंट कंक्रीट मिक्सर से मालपुआ का गोल बनाया जा रहा है। 40 भट्टियां एक लाइन में धधक रही हैं और इन भट्टियों पर 800 हलवाई विशाल भंडारा बनाने का काम कर रहे हैं। यह नजारा देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे, क्योंकि यह विशाल भंडारा उन लाखों लोगों के लिए प्रतिदिन तैयार किया जा रहा है जो मध्य प्रदेश के भिंड जिले स्थित दंदरौआ धाम आयोजित धार्मिक आयोजन का आनंद लेने के लिए पहुंच रहे हैं।
'डॉक्टर हनुमान' के नाम से प्रसिद्ध दंदरौआ धाम मंदिर पर 'सिय-पिय मिलन' महोत्सव का आयोजन हो रहा है। हर साल होने वाले इस महोत्सव में इस बार कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा भी आए हुए हैं। पंडित प्रदीप मिश्रा के मुख से शिव महापुराण कथा को सुनने के लिए प्रतिदिन यहां 2 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इन श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रसादी का इंतजाम भी दंदरौआ धाम में किया गया है। प्रतिदिन यहां 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया जा रहा है।
इतनी बड़ी संख्या में लोगों के लिए भंडारा तैयार करने के लिए यहां 800 हलवाइयों को काम पर लगाया गया है। भंडारा तैयार करने के लिए दंदरौआ धाम में 40 भट्टियों को बनाया गया है। इन भट्टियों पर दिनभर 800 हलवाई दो शिफ्ट में भोजन बनाने का काम कर रहे हैं। इन हलवाइयों में 500 पुरुष हलवाई और 300 महिला हलवाई शामिल हैं। भंडारे में प्रतिदिन खीर, पूरी, बूंदी, सब्जी और मालपुआ तैयार किए जाते हैं।
दंदरौआ धाम से मिली जानकारी के अनुसार, प्रतिदिन दंदरौआ धाम पर भंडारे के लिए 100 क्विंटल आटे के मालपुए बनाए जा रहे हैं। मालपुआ बनाने के लिए पहले आटे का घोल तैयार किया जाता है और इसके लिए सीमेंट कंक्रीट मिक्सर मशीन का उपयोग किया जा रहा है। यहां सेवा कर रहे सेवक आटे से भरी बोरी को सीमेंट कंक्रीट मिक्सर में उड़ेल देते हैं और फिर सीमेंट कंक्रीट मिक्सर की मदद से मालपुआ के लिए घोल तैयार किया जाता है। इसके साथ ही यहां खीर बनाने के लिए प्रतिदिन 4000 लीटर दूध का भी उपयोग किया जा रहा है। आसपास के गांव से इस दूध का इंतजाम हो रहा है।
पिछले साल यहां पर सिय पिय मिलन महोत्सव में धीरेंद्र शास्त्री आए थे और यहां उन्होंने राम कथा वाचन के साथ दिव्य दरबार भी लगाया था। उस दौरान भी इसी तरह के विशाल भंडारे का आयोजन किया गया था।
















































































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