जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 पर ओआईसी का समर्थन, चुनावों के बीच गरमाई बहस।
जम्मू-कश्मीर में चल रहे चुनावों के बीच कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का मुद्दा फिर से गरमा गया है। 2019 में पीएम मोदी के इस फैसले ने इस्लामिक संघ (ओआईसी) के 57 देशों को चिढ़ा दिया है। इस संदर्भ में, पाकिस्तान ने बृहस्पतिवार को कहा कि ओआईसी के संपर्क समूह ने कश्मीरी लोगों के प्रति अपने समर्थन की पुष्टि की है और भारत से मांग की है कि वह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं के अनुसार इस मुद्दे का समाधान करे। भारत ने पहले भी ओआईसी पर निशाना साधते हुए कहा है कि इस तरह के संगठन को अपने निहित स्वार्थों के लिए देश के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। भारत ने स्पष्ट किया है कि ओआईसी को जम्मू-कश्मीर से संबंधित मामलों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा कि जम्मू-कश्मीर पर इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के संपर्क समूह की बैठक बुधवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र के दौरान हुई। इस बैठक की अध्यक्षता ओआईसी महासचिव हिसेन ब्राहिम ताहा ने की, जिसमें पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्किये, नाइजर और अजरबैजान जैसे देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कश्मीरी लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल भी इसमें मौजूद था
बैठक में एक संयुक्त बयान पारित किया गया, जिसमें ओआईसी ने कश्मीरी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को हासिल करने के लिए उनके "वैध संघर्ष" के प्रति अपने निरंतर समर्थन की पुष्टि की। संयुक्त बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता कश्मीर मुद्दे के अंतिम समाधान पर निर्भर है। इसमें कश्मीरी राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाने और कश्मीरी कार्यकर्ताओं की संपत्ति जब्त करने के कथित अभियान की निंदा की गई। ओआईसी ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर में चुनावी गतिविधियाँ आत्मनिर्णय के अधिकार की जगह नहीं ले सकतीं। ओआईसी, जिसका मुख्यालय सऊदी अरब के जेद्दा में है, आमतौर पर पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है और कश्मीर मुद्दे पर इस्लामाबाद के पक्ष में खड़ा होता रहा है।
















































































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