दिल्ली में सराय काले खां चौक का नाम बदलकर बिरसा मुंडा चौक रखने की घोषणा।
दिल्ली के सराय काले खां चौक का नाम बदलकर अब बिरसा मुंडा चौक कर दिया गया है। यह जानकारी गृह मंत्री अमित शाह ने दी। अब यह चौक भगवान बिरसा मुंडा के नाम से जाना जाएगा, जो भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
कौन हैं बिरसा मुंडा?
बिरसा मुंडा भारतीय आदिवासी आंदोलन के महान नेता थे, जिन्हें झारखंड में भगवान की तरह पूजा जाता है। आज, 15 नवंबर 2024 को उनकी 150वीं जयंती मनाई जा रही है, और देश भर में इसे जनजाति गौरव दिवस के रूप में सम्मानित किया जा रहा है। बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को रांची (अब झारखंड) के उलीहातू गांव में एक आदिवासी परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम सुगना मुंडा था और मां का नाम करमी मुंडा था। बिरसा मुंडा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मिशनरी स्कूल से प्राप्त की। इसी दौरान, उन्होंने देखा कि अंग्रेज भारतीयों पर जुल्म कर रहे हैं। इस अत्याचार के खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष की शुरुआत की।
बिरसा मुंडा के प्रमुख आंदोलन
1. 1894 में अकाल और महामारी:
छोटा नागपुर क्षेत्र में जब अकाल और महामारी ने प्रकोप मचाया, बिरसा मुंडा ने समाज की सेवा की और प्रभावित लोगों की मदद की।
2.1895 में आंदोलन और गिरफ्तारी:
बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों के खिलाफ लगान माफी आंदोलन शुरू किया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें 1895 में गिरफ्तार कर लिया गया और हजारीबाग जेल भेज दिया गया।
3. 1897-1900 के बीच संघर्ष:
1897 से 1900 के बीच बिरसा मुंडा और अंग्रेजों के बीच कई संघर्ष हुए, जिनमें उन्होंने मुंडा जनजाति के अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया। बिरसा मुंडा का संघर्ष आज भी प्रेरणा का स्रोत है, और उनकी जयंती को आदिवासी समाज के गौरव और संघर्ष की पहचान के रूप में मनाया जाता है।
















































































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