मिल्कीपुर में उपचुनाव की तारीख का इंतजार, बीजेपी और सपा की सियासी जंग। 

अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर उपचुनाव का रास्ता साफ हो गया है, क्योंकि हाईकोर्ट ने बीजेपी नेता और पूर्व विधायक गोरखनाथ बाबा की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने अवधेश प्रसाद की निर्वाचन को चुनौती दी थी। अब चुनाव आयोग किसी भी समय इस सीट पर उपचुनाव की तारीख का ऐलान कर सकता है। इससे अयोध्या में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच मुकाबला और सियासी हलचल तेज हो गई है। कोर्ट का आदेश कुछ दिनों में अपलोड होने के बाद चुनाव आयोग आगे की कार्रवाई शुरू करेगा, और जिला प्रशासन पहले ही चुनाव की तैयारी कर चुका है। इसके बाद मिल्कीपुर में सियासी गतिविधियाँ और तेज होंगी।

यूपी की नौ सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी की जीत के बाद पार्टी का हौसला काफी बढ़ा है। अब बीजेपी की नजर मिल्कीपुर सीट पर है, जिसे जीतकर वह फैजाबाद सीट पर सपा से मिली हार का बदला लेना चाहती है। हाल के चुनावों में बीजेपी ने कुंदरकी और कटेहरी जैसी सपा के गढ़ मानी जाने वाली सीटों पर कब्जा किया है। कुंदरकी में तो बीजेपी ने 31 साल बाद जीत हासिल की है। मिल्कीपुर सीट पर 2022 के चुनाव में सपा के अवधेश प्रसाद ने जीत हासिल की थी, लेकिन 2024 में वे फैजाबाद से सांसद बन गए, जिससे यह सीट खाली हो गई। अब यहां उपचुनाव होगा। सपा ने पहले ही अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है, जबकि बीजेपी ने अभी तक अपने प्रत्याशी का नाम नहीं घोषित किया है। बीजेपी में इस सीट के लिए कई दावेदार हैं, और सपा के लिए अपने गढ़ को बचाना बड़ी चुनौती होगी।

 

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