राज्यसभा में उपराष्ट्रपति धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, 60 हस्ताक्षरों के बावजूद विपक्ष की एकजुटता पर संदेह!
राज्यसभा में विपक्षी गठबंधन ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया है। इस प्रस्ताव में 60 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि सोनिया गांधी या किसी अन्य प्रमुख दल के फ्लोर लीडर ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इससे विपक्ष की एकजुटता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, पहले भी धनखड़ के खिलाफ ऐसे प्रस्ताव लाए गए हैं, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए थे। वर्तमान में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास राज्यसभा में बहुमत है और अब उनके पास 119 सदस्य हैं, जो प्रस्ताव के पारित होने की संभावना को कम करते हैं। राज्यसभा में कुल 237 सदस्य हैं, और आने वाले चुनावों में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के 11 सदस्य रिटायर होंगे, लेकिन इनमें से अधिकांश भाजपा के सदस्य हैं, जिससे विपक्षी गठबंधन के लिए कोई बड़ा बदलाव मुश्किल है।
उपराष्ट्रपति को राज्यसभा सभापति पद से हटाने की प्रक्रिया: संविधान के आर्टिकल 67(बी) के तहत नियम और चुनौतीपूर्ण कदम
उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के सभापति पद से हटाने के लिए संविधान के आर्टिकल 67(बी) में स्पष्ट प्रक्रिया है। इसके तहत, प्रस्ताव केवल राज्यसभा में पेश किया जा सकता है और इसे 14 दिन पहले नोटिस देने के बाद बहुमत से पारित करना होता है। इसके बाद, लोकसभा में भी प्रस्ताव को साधारण बहुमत से मंजूरी मिलनी जरूरी है। हालांकि, जब तक प्रस्ताव विचाराधीन हो, सभापति सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते, और यह पूरी प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल है।
















































































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