बैगा परिवारों को गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति का निमंत्रण, सरकारी योजनाओं से सुधार और बैगा जनजाति की मुख्यधारा में एंट्री। 

यह खबर बैगा परिवारों के लिए गर्व और खुशी का मौका है, क्योंकि उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। यह उनके लिए एक ऐतिहासिक अवसर है और बैगा समुदाय की संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिल रही है। इसके साथ ही, सरकारी योजनाओं के तहत उन्हें घर और अन्य लाभ भी मिल रहे हैं, जिससे उनकी ज़िंदगी में सुधार हो रहा है। बैगा जनजाति, जो छत्तीसगढ़ की एक विशेष पिछड़ी जनजाति है, की जनसंख्या 88,317 है, और उनकी साक्षरता दर में सुधार हो रहा है। यह सब दिखाता है कि सरकारी प्रयासों से सामाजिक और आर्थिक स्थिति में बदलाव आ रहा है, और बैगा समुदाय मुख्यधारा में शामिल हो रहा है।

बैगा जनजाति की साक्षरता दर 53.97% है, जिसमें पुरुषों की साक्षरता दर 60.78% और महिलाओं की साक्षरता दर 47.10% है। यह आंकड़े बताते हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी काफी काम किया जाना बाकी है, विशेष रूप से महिलाओं की साक्षरता दर में सुधार की आवश्यकता है। बैगा जनजाति छत्तीसगढ़ के मध्य क्षेत्र में मुख्य रूप से बसी हुई है। ये जनजाति कबीरधाम जिले के बोडला और पण्डरिया विकासखंड, बिलासपुर जिले के कोटा और तखतपुर विकासखंड, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड, कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़, खंण्डगवा और भरतपुर विकासखंड, और राजनांदगांव जिले के छुइखदान और लोरमा विकासखंड में अधिकतम संख्या में निवास करती है। इन क्षेत्रों में इनकी सबसे बड़ी जनसंख्या कबीरधाम और कोरिया जिलों में पाई जाती है। यह जानकारी दिखाती है कि बैगा समुदाय विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के कुछ प्रमुख इलाकों में बसे हुए हैं और उनकी साक्षरता दर और जीवन स्तर में सुधार के लिए अभी भी बहुत सी सरकारी पहलें और योजनाएं आवश्यक हैं।


 

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