सुप्रीम कोर्ट ने महाकुंभ भगदड़ मामले में सुनवाई से किया इनकार, इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने का दिया आदेश। 

सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज महाकुंभ में हुई भगदड़ को एक "दुर्भाग्यपूर्ण घटना" बताते हुए इस मामले में सुरक्षा उपायों और दिशा-निर्देश लागू करने के लिए दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिका दायर करने वाले वकील से कहा कि वह इस मुद्दे को इलाहाबाद हाई कोर्ट में ले जाएं, क्योंकि वहां पर इस पर विस्तृत सुनवाई हो सकती है।  सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका में मांग की गई कार्रवाई और दिशा-निर्देशों के लिए संबंधित राज्य और प्रशासन जिम्मेदार हैं, और ऐसे मामलों को पहले स्थानीय अदालतों में हल किया जाना चाहिए। इस याचिका में यह भी कहा गया था कि तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए और प्रत्येक राज्य में मेला क्षेत्रों में सुविधा केंद्र खोले जाएं ताकि गैर-हिंदी भाषी नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

महाकुंभ में मौनी अमावस्या के दिन हुई भगदड़ के बाद, सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की, जिसमें घटना पर स्टेटस रिपोर्ट और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि सभी राज्यों को मेले में सुविधा केंद्र खोलने चाहिए, ताकि गैर हिंदी भाषी नागरिकों को कोई परेशानी न हो। 29 जनवरी को हुई भगदड़ में 30 लोगों की मौत हो गई थी और 60 लोग घायल हुए थे। हालांकि, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का मेला क्षेत्र में आना जारी है और भगदड़ का प्रभाव वहां आ रहे श्रद्धालुओं पर ज्यादा दिखाई नहीं दे रहा। इसके बाद, सरकार ने मेला क्षेत्र में भीड़ के प्रबंधन के लिए कुछ कदम उठाए हैं, जिनमें बाहरी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध और VVIP पासों को रद्द करना शामिल है।

 

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