चाचा पशुपति पारस और चिराग होगें पास, BJP कराएगी दोनों में समझौता?

चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति पारस के बीच, आपस की राजनीतिक तनातनी, काफी महीनों से जनता के बीच उजागर हो रही है। यहां तक की बीजेपी ने भी दोनों की साझेदारी को निभाने के लिए अपना एक बड़ा कदम उठाने का विचार बनाया है। ऐसे में लोकसभा चुनाव में एनडीए में 20 लोकसभा सीटों को लेकर खटपट हो सकती है। 
बिहार में 40 लोकसभा सीटों में से 20 पर दावेदार खड़े हो गए हैं और राष्ट्रीय लोकनायक जनता दल, हिंदू आवाम मोर्चा और चिराग  पासवान और पशुपति पारस  का साथ भी, बीजेपी का खेल बिगाड़ सकती है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि चुनाव से पहले बीजेपी इन सभी मुद्दों को देखते हुए चिराग पासवान और पशुपति पारस के बीच समझौता कर ही देगी। हम आपको बताना चाहेंगे कि चिराग पासवान की अगुवाई वाली LJP की सात सीटों का दावा है। यानी पशुपति कुमार पारस ने कोई भी दावा नहीं किया है। हिंदुस्तानी आवाम् मोर्चा का दावा 5 सीटों का है। इन दलों ने  सिर्फ 8 सीटों पर तैयारी कर, अपनी घोषणा कर दी है। 
2024 के चुनाव में करकट, सीतामढ़ी और जहानाबाद के अलावा पांच सीट और भी हैं, जैसे सिवान,  मुंगेर,  बाल्मीकि नगर,  सुपौल और झंझारपुर। यह सभी आठ सीटें जे डी यू की जीती हुई हैं और 2019 में लोकसभा की 6 सीटें मिली थी। सातवीं सीट पर पार्टी के संस्थापक, रामविलास पासवान राज्यसभा भेजे गए थे, इसलिए LJP 7 सीटों पर अपना दावा एक बार फिर से कर रही है। संकट यह है कि  दावा दोनों गुटों का है और उम्मीद भी एक ही है कि, भाजपा दोनों को मिलाकर एक मंच पर लेकर आएगी और तब LJP कम से कम 7 से कम, एक भी सीट पर राजी नहीं होगी ! यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि रामविलास पासवान के सुपुत्र चिराग पासवान ने बीजेपी को ज्वाइन करने के बाद अपने चाचा पशुपति पारस की मुश्किलें भड़ा दी हैं और एक ही जगह से दो लोगों का चुनाव में खड़े होकर जीतना संभव नहीं है। 
अब यह लोकसभा के चुनाव के पहले होने वाला फैसला, बेहद अहम होगा कि कौन किस सीट पर खड़ा होता है और साथ ही, कैसे जीत्ता है। 

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