2047 तक वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या 60 करने की योजना, भारतीय फाइटर जेट्स का बड़ा कदम। 

भारतीय वायुसेना अगले 5 से 10 सालों में अपने बेड़े में 114 नए फाइटर जेट शामिल करेगी, जिन्हें रिटायर होने जा रहे विमानों की जगह तैनात किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय कमिटी ने इस योजना को मंजूरी दे दी है। यह कदम भारतीय वायुसेना को अगले 10 सालों तक अपनी स्क्वाड्रन पॉवर बनाए रखने में मदद करेगा, क्योंकि 2037 तक कई प्रमुख फाइटर जेट्स जैसे जगुआर, मिराज-2000 और मिग-29 रिटायर हो जाएंगे। भारतीय वायुसेना इन विमानों की जगह वैश्विक टेंडर्स के जरिए नए लड़ाकू विमानों को शामिल करने की प्रक्रिया में है, ताकि एयरफोर्स की ताकत बनी रहे। 

सूत्रों के मुताबिक, भारतीय वायुसेना ने आगामी टेंडर में राफेल, ग्रिपेन, यूरोफाइटर टाइफून, मिग-31 और एफ-16 जैसे फाइटर जेट्स को शामिल करने की योजना बनाई है, जो पहले 126 लड़ाकू विमानों के लिए हुए टेंडर में भी शामिल हो चुके थे। इसके अलावा, वायुसेना अपनी स्क्वाड्रन संख्या 2047 तक 60 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखती है। 114 नए फाइटर जेट्स के साथ-साथ स्वदेशी 'तेजस' के विभिन्न संस्करणों जैसे मार्क-1ए और मार्क-2 को भी वायुसेना में शामिल किया जाएगा। फिलहाल, भारतीय वायुसेना के पास केवल 36 राफेल फाइटर जेट्स हैं, जो 4.5 जनरेशन के हैं. इसके कारण, वायुसेना को अपनी ताकत बढ़ाने के लिए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना बना रही है। 

 

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