मायावती ने सपा की राजनीति पर उठाए सवाल, दलितों को सावधान रहने की दी चेतावनी!

उत्तर प्रदेश के आगरा में समाजवादी पार्टी (सपा) के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन के घर पर हुए हमले ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। लेकिन इस बार तूफान सिर्फ हवा का नहीं, बल्कि मायावती के तानों का भी है, जो सपा के पुराने घावों को ताजा कर रही हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मायावती ने लिखा, “आगरा घटना के साथ-साथ सपा मुखिया को 2 जून 1995 सौ पंचानबे को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड में मेरी जान पर किए गए हमले को भी याद करना चाहिए। अगर भुला दिया हो, तो मैं याद दिला देती हूं! उस घटना का पश्चाताप भी करना चाहिए।” यह बयान ऐसा था, जैसे पुराने घावों पर नमक छिड़क दिया हो। मायावती ने सपा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “अब सपा आगरा घटना की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटी सेंकना बंद करे। दलितों के खिलाफ यह खेल खेलना अब और नहीं चलेगा।” उनके शब्दों में ऐसी धार थी कि जैसे वह सपा के हर पत्ते को पलट रही हों।  

बसपा प्रमुख ने आगे कहा, “सपा अपने दलित नेताओं को आगे रखकर जो घिनौनी राजनीति कर रही है, वह बेहद चिंताजनक है। दलितों को इनके सारे हथकंडों से सावधान रहना चाहिए। कहीं यह राजनीति ‘अपना बनाना’ से ‘नष्ट करना’ की ओर न बढ़ जाए। राजनीतिक हलकों में इस बयान के बाद हंगामा मच गया। सपा पर आरोप है कि वह अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए किसी भी समुदाय का अपमान करने से नहीं चूकती। मायावती ने तंज कसते हुए कहा, “किसी को ‘दुर्गंध’ तो किसी को ‘सुगंध’ बना देती है, पर समाज को सौहार्द की खुशबू देना भूल गई है। अब सवाल उठता है—क्या सपा इस चुनौती का सामना कर पाएगी या मायावती के इस वार के बाद उसे अपने पुराने घावों को फिर से खोलना पड़ेगा? राजनीति के इस मंच पर खेल अब और भी दिलचस्प हो गया है।

 

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