इजरायल-ईरान युद्ध ने बढ़ाया परमाणु खतरा: ऑपरेशन 'राइजिंग लायन' और 'ट्रू प्रॉमिस 3' हुए आमने-सामने। 

इजरायल और ईरान के बीच युद्ध तीव्र हो गया है, जिसमें दोनों देशों ने एक-दूसरे पर बड़े हमले किए हैं। इजरायल ने 13 जून 2025 को 'ऑपरेशन राइजिंग लायन' के तहत ईरान के 100 से अधिक सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमले किए, जिनमें तेहरान का नतांज यूरेनियम संवर्धन संयंत्र और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का मुख्यालय शामिल है। इस हमले में ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारी, जैसे चीफ ऑफ स्टाफ और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर, मारे गए। इजरायल के अनुसार, इस हमले में ईरान के 90 से अधिक लोग मारे गए और 329 से अधिक घायल हुए। इससे पहले, ईरान ने इजरायल के तेल अवीव और यरुशलम पर मिसाइल हमले किए थे, जिनमें तीन इजरायली नागरिक मारे गए थे। ईरान ने इस हमले का जवाब 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3' के तहत दिया, जिसमें 150 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलों और 100 से अधिक ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। इससे पहले, ईरान ने अक्टूबर 2024 में 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 2' के तहत हाइपरसोनिक मिसाइलों का उपयोग किया था, जो तकनीकी दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कदम था। 

इस संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इससे तेल की कीमतों में वृद्धि, वैश्विक शिपिंग मार्गों में व्यवधान और हवाई यातायात में रुकावटें आई हैं। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संघर्ष को और बढ़ने से रोकने के उपायों पर विचार कर रहा है। यह युद्ध केवल सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, परमाणु प्रसार और वैश्विक कूटनीति पर भी गहरे प्रभाव डाल सकता है।


 

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