उत्तराखंड सरकार ने लिया बड़ा फैसला: भूस्खलन और बाढ़ के खतरे के कारण चारधाम यात्रा को अस्थायी तौर पर किया गया बंद, श्रद्धालुओं को दिया गया अलर्ट।
उत्तराखंड में जारी भारी बारिश और भूस्खलन की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोकने का बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को इस निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि वर्तमान में तीर्थयात्रियों की जान की सुरक्षा सर्वोपरि है और मौसम पूरी तरह अनुकूल होने के बाद ही यात्रा को दोबारा शुरू किया जाएगा। उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में बीते कुछ दिनों से लगातार मूसलधार बारिश हो रही है, जिससे नदियां उफान पर हैं और कई स्थानों पर सड़कें टूट गई हैं, भूस्खलन के कारण रास्ते बंद हो गए हैं। इससे न सिर्फ यातायात बाधित हो गया है, बल्कि हजारों तीर्थयात्री फंस भी गए हैं।
इस बीच सबसे बड़ी चिंता की स्थिति सोनप्रयाग क्षेत्र में देखने को मिली, जहां केदारनाथ से लौट रहे 40 से अधिक श्रद्धालु भूस्खलन के कारण फंस गए थे। रात करीब 10 बजे भारी मलबा गिरने से रास्ता अवरुद्ध हो गया था। जैसे ही इसकी सूचना प्रशासन को मिली, तुरंत एसडीआरएफ की टीमें घटनास्थल पर भेजी गईं और रातभर चले अभियान में सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला गया। राहत की बात ये रही कि कोई बड़ा जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। सीएम धामी ने बताया कि सभी ज़िला प्रशासन, आपदा प्रबंधन टीमें, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ पूरी तरह अलर्ट पर हैं और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे फिलहाल यात्रा से बचें और राज्य सरकार की तरफ से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि चारधाम यात्रा को लेकर आगे की सभी घोषणाएं मौसम विभाग की रिपोर्ट और स्थल की स्थिति को देखते हुए की जाएंगी। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे पवित्र धामों की यह यात्रा हर साल लाखों श्रद्धालु करते हैं, लेकिन वर्तमान मौसम ने सभी को सतर्क कर दिया है। सरकार का यह फैसला श्रद्धालुओं की जान की हिफाज़त के लिए अहम माना जा रहा है।
















































































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