‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप ऑफ इंडिया’ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में मिली जगह, भारत को मिली 44वीं वैश्विक मान्यता।
यूनेस्को की 47वीं बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय के तहत भारत के नामांकन 'मराठा मिलिट्री लैंडस्केप ऑफ इंडिया' को वर्ष 2024–25 के लिए विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है। यह भारत की 44वीं विश्व धरोहर संपत्ति है, जो देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, स्थापत्य प्रतिभा और ऐतिहासिक परंपराओं को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाती है। यह मान्यता मराठा साम्राज्य की सैन्य रणनीति, किले निर्माण की अनूठी शैली और क्षेत्रीय शक्ति संरचना को भी सम्मानित करती है। इस धरोहर में महाराष्ट्र के प्रमुख किले जैसे – साल्हेर, शिवनेरी, लोहगढ़, खंडेरी, रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला, विजयदुर्ग और सिंधुदुर्ग, तथा तमिलनाडु का गिंगी किला शामिल हैं। ये सभी किले 17वीं और 18वीं सदी में मराठा सैन्य वास्तुकला की उत्कृष्ट मिसाल हैं, जो स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाए गए थे। इस मान्यता से न केवल भारत की ऐतिहासिक पहचान को मजबूती मिली है, बल्कि इन स्थलों के संरक्षण और वैश्विक पर्यटन की दृष्टि से भी नए अवसर खुलेंगे। यह निर्णय मराठा विरासत के प्रति सम्मान और भारत के विविध सांस्कृतिक इतिहास की वैश्विक मान्यता का प्रतीक है।
यूनेस्को की 47वीं बैठक में 'मराठा मिलिट्री लैंडस्केप ऑफ इंडिया' को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। यह भारत की 44वीं विश्व धरोहर संपत्ति है। इसमें महाराष्ट्र और तमिलनाडु के 12 ऐतिहासिक किले शामिल हैं, जिनमें से कुछ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और कुछ महाराष्ट्र सरकार के अधीन संरक्षित हैं। यह सैन्य किले भारत की दुर्ग निर्माण परंपरा, रणनीतिक सोच और भौगोलिक समझ को दर्शाते हैं। 18 महीने की समीक्षा और ICOM दौरे के बाद, 20 में से 18 सदस्य देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। इस उपलब्धि पर देशभर में उत्सव है और भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुभकामनाएं मिली हैं।
















































































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