भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग का नया मुकाम: अपाचे हेलीकॉप्टर के जरिए सीमाओं की सुरक्षा में आएगी जबरदस्त मजबूती।
भारतीय सेना को अमेरिकी रक्षा कंपनी बोइंग से अत्याधुनिक तीन AH-64E अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्राप्त हो चुके हैं। यह डिलीवरी ₹4,168 करोड़ की डील का हिस्सा है, जिसके तहत कुल छह हेलीकॉप्टर दिए जाएंगे। एक हेलीकॉप्टर की कीमत ₹860 से ₹948.5 करोड़ के बीच है। इससे पहले, 2015 में भारतीय वायु सेना को 22 अपाचे हेलीकॉप्टरों की डील के तहत आपूर्ति की गई थी। अब थल सेना के लिए अलग से यह खरीद की गई है, जो दोहरे मोर्चे पर भारत की सैन्य क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है AH-64E अपाचे सिर्फ एक सामान्य हेलीकॉप्टर नहीं है, बल्कि यह एक मल्टी-रोल कॉम्बैट प्लेटफॉर्म है। इसकी ऊँची लागत इसके उन्नत हथियार सिस्टम, सेंसर, लॉन्गबो रडार, नेटवर्क क्षमताओं और सुरक्षा प्रणालियों के कारण है। इसका लॉन्गबो रडार रोटर के ऊपर स्थित होता है, जिससे यह छुपकर दुश्मन को ट्रैक और अटैक करने में सक्षम होता है। हेलीकॉप्टर में Manned-Unmanned Teaming (MUM-T) तकनीक है, जिससे यह ड्रोन के साथ तालमेल में काम कर सकता है, और पायलट ड्रोन को रियल टाइम में नियंत्रित कर सकता है।
इस हेलीकॉप्टर में इन्फ्रारेड, नाइट-विज़न और लेजर-गाइडेड सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकें मौजूद हैं, जिससे यह किसी भी मौसम और समय में सटीक ऑपरेशन करने में सक्षम है। सुरक्षा की दृष्टि से इसमें क्रैश-रेसिस्टेंट सीटें, इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स और दुश्मन के रडार/मिसाइलों से बचाव के लिए यूनिफाइड डिफेंस सिस्टम मौजूद है। यह डील केवल एक सैन्य उपकरण की खरीद नहीं है, बल्कि यह भारत की रक्षा नीति, रणनीतिक तैयारी और वैश्विक साझेदारियों की दिशा में एक दूरदर्शी पहल का हिस्सा है। हालांकि कोविड-19 महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण इसकी डिलीवरी में लगभग 15 महीने की देरी हुई, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और रक्षा कूटनीति के समक्ष नई चुनौतियाँ खड़ी हुई हैं।
















































































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