महादेवी को वनतारा भेजे जाने से नाराज़ गांववालों ने जियो सेवाओं का किया बहिष्कार, 700 गांवों में दिखा विरोध।
महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के ऐतिहासिक नंदिनी मठ से अदालत के आदेश पर महादेवी नाम की हथिनी को गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा भेजा गया। लेकिन इस फैसले से नाराज़ स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों की मठ से गहरी आस्था जुड़ी है और वे महादेवी को मठ का अभिन्न हिस्सा मानते थे। विरोधस्वरूप कोल्हापुर के 700 से अधिक गांवों ने रिलायंस जियो की सेवाओं का बहिष्कार शुरू कर दिया है और सिम कार्ड पोर्ट करवाए जा रहे हैं। हालात को देखते हुए वनतारा के सीईओ को भी कोल्हापुर पहुंचना पड़ा। 28 जुलाई को जब महादेवी को ले जाया गया, तब भारी संख्या में लोग उसे विदा करने पहुंचे, जिससे इस फैसले की भावनात्मक गंभीरता और स्पष्ट हो गई। कोल्हापुर के नंदनी मठ से जुड़ी 33 वर्षों पुरानी महादेवी हथिनी को गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा भेजे जाने से स्थानीय लोगों में गहरा दुख और आक्रोश है। महादेवी सिर्फ एक हथिनी नहीं, बल्कि धार्मिक परंपराओं और भावनाओं का प्रतीक रही है। वन्य जीवों की देखरेख के लिए बनाए गए वनतारा की स्थापना उद्योगपति मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी ने की है, लेकिन कोल्हापुर के लोग महादेवी को नंदनी मठ का हिस्सा मानते हैं। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री प्रकाश अबितकर ने जानकारी दी कि वनतारा के अधिकारी महादेवी को वापस लाने में सहयोग का आश्वासन दे चुके हैं। लोग अब भी उसकी वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
पेटा, पर्यावरण एवं वन विभाग, और बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट की शिकायतों के चलते कोल्हापुर के नंदिनी मठ की प्रिय महादेवी हथिनी को गुजरात के वनतारा में स्थानांतरित किया गया। अदालत के आदेश का सम्मान करते हुए मठ और ग्रामीणों ने हथिनी को भावुक विदाई दी, लेकिन अब उसकी अनुपस्थिति ग्रामीणों को खल रही है। लोगों ने हथिनी के स्थानांतरण के लिए रिलायंस समूह को जिम्मेदार ठहराते हुए उसे वापस लाने की मांग शुरू कर दी है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और शिवसेना नेता प्रकाशराव अबिटकर ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि महादेवी को वापस लाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
















































































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