दिल्ली में खुलेआम बिक रहा है जानलेवा चीनी मांझा, कोड वर्ड 'धागा 302' बन गया है मासूम पक्षियों की जान का दुश्मन। 

दिल्ली में पतंगबाजी के शौक ने एक बार फिर खतरनाक रूप ले लिया है, जहां प्रतिबंधित चीनी मांझा खुलेआम बेचा जा रहा है। प्रशासन की आंखों के सामने यह मांझा कोड वर्ड 'धागा 302' के नाम पर व्हाट्सएप ऑर्डर, सादे कागज में पैकिंग और तय स्थानों पर डिलीवरी के ज़रिए बाजार में पहुंच रहा है। लालकुआं, सदर बाजार, तुर्कमान गेट और ओखला जैसे इलाकों में यह काले बाजार का हिस्सा बन चुका है। दुकानदार इसे छिपाकर और चरखी के बिना बेचते हैं ताकि कानूनी कार्रवाई से बच सकें। यह मांझा नायलॉन या प्लास्टिक से बना होता है, जिस पर कांच और धातु की परत चढ़ाई जाती है, जिससे यह अत्यधिक धारदार बन जाता है।

इस जानलेवा मांझे की वजह से बीते कुछ दिनों में 250 से ज्यादा पक्षी घायल हो चुके हैं। "विद्या सागर जीव दया परिवार" जैसे संगठनों के अनुसार, कई पक्षियों की आंखों की रोशनी चली गई, पंख कट गए और कुछ की जान भी चली गई। खासकर कबूतर, चील और तोते इसकी सबसे बड़ी चपेट में आ रहे हैं। NGO को 1 से 4 अगस्त के बीच 300 से अधिक कॉल्स मिले, जिनमें हर दिन 50 से ज्यादा घायल पक्षियों को बचाया गया, लेकिन उनमें से कुछ को बचाया नहीं जा सका। दिल्ली पुलिस ने 4 अगस्त को दो लोगों को गिरफ्तार कर उनके पास से 660 रोल चीनी मांझा बरामद किया, लेकिन इसके बावजूद बाजार में इसकी आपूर्ति थमी नहीं है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत इस मांझे का निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पूरी तरह अवैध है। इसके बावजूद यह मांझा सरेआम बिक रहा है। इसके इस्तेमाल पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत ₹5,000 का जुर्माना या एक साल तक की सजा हो सकती है। एनजीओ, पर्यावरण कार्यकर्ता, डॉक्टर और दुकानदार अब सरकार से इस पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। साथ ही जनता से भी अपील की जा रही है कि इस खतरनाक मांझे को न खरीदें, न बेचें और न ही इसका समर्थन करें, ताकि पक्षियों की जान और पर्यावरण दोनों को बचाया जा सके।

 

Leave Your Message

Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).

ट्रेंडिंग

शॉर्ट्स

हमारा देश

गैलरी

विदेश

शॉर्ट्स

मनोरंजन से

गैलरी

खेल-कूद

शॉर्ट्स

ग्रह-नक्षत्र

जरा इधर भी

शॉर्ट्स

ब्रॉडकास्ट्स