ब्रिक्स का वैश्विक प्रभाव बढ़ा – रूस और चीन भारत के साथ व्यापार बढ़ाने को तैयार, अमेरिका के टैरिफ वॉर ने खुद उसके किसानों को पहुंचाया संकट में।
अमेरिका की टैरिफ नीति अब उसी पर भारी पड़ रही है। जहां पहले वह दुनिया को टैरिफ के जरिए दबाने की कोशिश करता था, अब वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अलग-थलग पड़ता दिख रहा है। यूरोप ने अमेरिकी सुरक्षा पर निर्भर रहने के बजाय अपना रक्षा बजट बढ़ाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है, जबकि भारत सहित ब्रिक्स देश अमेरिका से हटकर नए व्यापारिक साझेदार तलाश रहे हैं। इसी का असर अमेरिकी सोयाबीन किसानों पर दिख रहा है। टैरिफ वॉर के चलते चीन, जो पहले अमेरिका से सबसे अधिक सोयाबीन खरीदता था, अब उससे दूरी बना रहा है। सितंबर-अक्टूबर के लिए चीन ने अमेरिका से एक भी टन सोयाबीन का ऑर्डर नहीं दिया। इससे अमेरिकी किसान परेशान हैं और उन्होंने ट्रंप को खत लिखकर आगाह किया है कि चीन जैसे बड़े ग्राहक को खोकर वे जीवित नहीं रह पाएंगे।
ब्रिक्स देशों ने अब अमेरिका पर आर्थिक दबाव बनाना शुरू कर दिया है। चीन और रूस, भारत के लिए अपने बाजार खोल रहे हैं और अमेरिका के दबाव से बाहर निकलने की रणनीति बना रहे हैं। चीन में भारत के राजदूत शू फेइहोंग ने अमेरिका के व्यवहार को "धौंस जमाने वाला" बताया और कहा कि चीन भारत के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। वहीं रूस के उप राजदूत रोमन बाबुश्किन ने भारत को अपने निर्यात के लिए रूस का दरवाजा खुला बताया। चीन अब अमेरिका की जगह ब्राजील (ब्रिक्स सदस्य) से सोयाबीन खरीद रहा है — जुलाई में चीन के कुल सोयाबीन आयात का 90% हिस्सा ब्राजील से आया। इसके साथ ही भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत शुरू हो गई है। भारत और चीन के संबंधों में भी धीरे-धीरे सुधार दिख रहा है। सीमा विवादों को हल करने की कोशिशों के साथ दोनों देशों ने डायरेक्ट फ्लाइट्स, व्यापार और रणनीतिक क्षेत्रों जैसे रेयर अर्थ मिनरल्स में सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। चीन ने भारत को भारी मशीनों, उर्वरकों और खनिजों की आपूर्ति का भरोसा दिया है और भारत भी चीनी व्यापार पेशेवरों के वीजा प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर रहा है।
















































































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