हर साल डूबता है गुरुग्राम, लेकिन नोएडा कैसे बच जाता है? सच चौकाने वाला है!

हर साल की तरह इस बार भी मानसून ने अपना असर दिखाया और गुरुग्राम फिर से बन गया ‘गुरु-तालाब’! वहीं, NCR के उसी क्षेत्र में पड़ने वाला नोएडा पूरी तरह सूखा और व्यवस्थित नजर आया। आखिर ऐसा क्यों? क्या गुरुग्राम की प्लानिंग में कोई बड़ी कमी है, या नोएडा सचमुच स्मार्ट सिटी है? आइए, इस रिपोर्ट में जानते हैं। बारिश होते ही गुरुग्राम की कई सड़कों पर पानी भर जाता है—DLF, साउथ सिटी, गोल्फ कोर्स रोड जैसे पॉश इलाकों में लोग घुटनों तक पानी में फंसे रहते हैं। गाड़ियां बंद, ऑफिस में देरी, स्कूल बंद। कई जगहों पर तो घरों में पानी घुस जाता है।

असल वजह है गुरुग्राम की तेजी से हुई अनियोजित अर्बनाइज़ेशन जिसने ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह चौपट कर दिया है। नाले संकरे हो गए हैं, कई जगह बिल्डिंगों के नीचे दबा दिए गए। सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित हैं, जमीन पर हालात खराब ही हैं। अब नजर डालते हैं नोएडा की ओर। यहां भी बारिश होती है, लेकिन पानी सड़कों पर टिकता नहीं। वजह है नोएडा की बेहतर और सुव्यवस्थित अर्बन प्लानिंग, मजबूत ड्रेनेज सिस्टम, सेक्टर-वार विकास, नियोजित नाले और नियमित रखरखाव। नोएडा अथॉरिटी समय-समय पर नालों की सफाई करती है और बारिश से पहले पूरी तैयारी कर लेती है। सबसे बड़ी बात ये कि यहां रियल एस्टेट को पर्यावरण के साथ संतुलित रूप से विकसित किया गया है। इसलिए अगली बार जब गुरुग्राम जलमग्न हो और नोएडा सूखा नजर आए, तो समझिए कि सिर्फ चमकदार बिल्डिंगें ही स्मार्ट सिटी की पहचान नहीं होती, बल्कि समझदारी से की गई प्लानिंग जरूरी है।

 

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