यमुना नदी की बाढ़ ने नोएडा के सेक्टर-135 के निचले इलाकों में तबाही मचा दी, किसानों के खेत और परिवारों के घर जलमग्न, स्थानीय लोग और प्रशासन मिलकर बचाव कार्य में जुटे।
यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर ने नोएडा के सेक्टर-135 के निचले इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। आमतौर पर यह नदी इस क्षेत्र से पाँच किलोमीटर दूर बहती है, लेकिन इस बार पानी का बहाव इतना तेज था कि वह रिहायशी इलाकों, फार्महाउसों और मुख्य सड़कों तक पहुँच गया। देखते ही देखते खेत जलमग्न हो गए, और कई घरों में 4 से 5 फीट तक पानी भर गया। किसानों की मेहनत से उगाई गई फसलें — धान, गाजर, गेहूं और भूसा — पूरी तरह बर्बाद हो गईं। कई लोगों की मोटरसाइकिलें और अन्य वाहन पानी में डूब गए, जिन्हें निकालने का मौका तक नहीं मिला। प्रशासन ने हालाँकि समय रहते राहत शिविर बना दिए थे, जिससे बड़ी जनहानि से बचाव हो गया। सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जहां खाने-पीने, दवाइयों और रहने की अस्थायी व्यवस्था की गई है। फिर भी, कई परिवार अब भी संकट में हैं — उनका कीमती सामान, घरेलू जानवर और दुधारू मवेशी पानी में फंसे हुए हैं। स्थानीय लोग खुद भी मदद के लिए आगे आ रहे हैं, कुछ लोग नावों से और कुछ लोग घुटनों तक पानी में चलकर ज़रूरतमंदों तक पहुंच रहे हैं।
प्रभावित परिवारों ने बताया कि पहले कभी इस क्षेत्र में ऐसा नज़ारा नहीं देखा गया था। बाढ़ का पानी जहां एक ओर जीवन को प्रभावित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर लोगों की रोज़ी-रोटी को भी निगल रहा है। बच्चों की स्कूलिंग रुकी हुई है, बुजुर्गों और बीमारों के लिए जरूरी दवाइयाँ तक पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन, एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की टीमें लगातार राहत कार्यों में जुटी हुई हैं, लेकिन मौसम और जलस्तर की अनिश्चितता के चलते स्थिति अब भी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ पाई है। लोग डरे हुए हैं, और भविष्य को लेकर चिंता में हैं कि अगर बारिश दोबारा हुई या यमुना का जलस्तर और बढ़ा, तो हालात और भयावह हो सकते हैं। अब ज़रूरत है दीर्घकालिक समाधान की, ताकि हर साल इस तरह की आपदा से लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त न हो।
















































































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