सरोजिनी नगर में 1 अक्टूबर से शुरू होगा पहला ‘सीएम श्री स्कूल’, जहां छात्रों को मिलेगा एआई-संचालित लाइब्रेरी और रोबोटिक्स लैब का लाभ।
दिल्ली के सरोजिनी नगर में राजधानी का पहला सीएम श्री स्कूल 1 अक्टूबर से छात्रों के लिए खुलने जा रहा है। यह उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन पर शुरू हुए "सेवा पखवाड़ा" अभियान का हिस्सा है। स्कूल का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और यह इस योजना के तहत शुरू होने वाला पहला संस्थान होगा। शुरुआत में स्मार्ट बोर्ड लगाने में आई तकनीकी दिक्कतों के कारण उद्घाटन और एडमिशन प्रक्रिया में कुछ देरी हुई थी। शिक्षा निदेशालय के अनुसार, कक्षा 6 से 8 तक के लिए प्रवेश परीक्षा 13 सितंबर को आयोजित की गई, जबकि पहले यह 6 सितंबर को प्रस्तावित थी। प्रवेश पत्र 10 सितंबर को जारी किए गए और चयनित छात्रों की सूची 20 सितंबर को प्रकाशित हुई। सितंबर के अंत तक पूरी एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
दिल्ली में 1 अक्टूबर से शुरू हो रहे सीएम श्री स्कूल राजधानी के सरकारी शिक्षा ढांचे को आधुनिक और प्रभावशाली रूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ये स्कूल केंद्र सरकार की पीएम श्री स्कूल योजना से प्रेरित हैं और इन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत तैयार किया गया है। इन स्कूलों में छात्रों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं जैसे एआई-संचालित लाइब्रेरी, एआर-वीआर से लैस स्मार्ट क्लासरूम, बायोमेट्रिक अटेंडेंस, और रोबोटिक्स लैब उपलब्ध होंगी। स्कूल का कैंपस पूरी तरह सौर ऊर्जा पर आधारित ग्रीन कैंपस होगा और इसमें जीरो-वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था भी होगी। यहां पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बच्चों को अनुभव आधारित और अनुसंधान-प्रेरित शिक्षा मिलेगी। सीट आरक्षण और पात्रता के तहत आधी सीटें सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों (जैसे एमसीडी, एनडीएमसी, नवोदय, केंद्रीय विद्यालय) के बच्चों के लिए आरक्षित होंगी। साथ ही SC, ST, OBC (नॉन-क्रीमी लेयर) और विशेष आवश्यकता वाले छात्रों को पात्रता में 5% की छूट दी जाएगी। दिल्ली सरकार ने वर्ष 2025-26 के बजट में 100 करोड़ रुपये सीएम श्री स्कूलों के लिए आवंटित किए हैं। खास बात यह है कि अब ये स्कूल CBSE से संबद्ध होंगे, क्योंकि दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन को बंद कर दिया गया है। यह स्कूल सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि नई सोच, नई तकनीक और समावेशी शिक्षा की ओर एक ठोस कदम है, जो बच्चों को भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार करेगा।
















































































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