सेनाध्यक्ष की सख्त चेतावनी: आतंकवाद नहीं रुका तो पाकिस्तान मिट सकता है नक्शे से!
भारतीय थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शुक्रवार को राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर के घड़साना क्षेत्र के गांव 22 एमडी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकारियों से मुलाकात की और सीमा पर आतंकवाद से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में पाकिस्तान को चेतावनी दी कि अगर उसने आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं किया, तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि इस बार भारतीय सेना पहले जैसा संयम नहीं बरतेगी। यदि पाकिस्तान आतंकवाद फैलाना बंद नहीं करता, तो "ऑपरेशन सिंदूर 2.0" जल्द ही शुरू किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर 1.0 के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया था, जिसमें लगभग 100 पाकिस्तानी सैनिक और कई आतंकी मारे गए थे। इस अभियान के साक्ष्य विश्व समुदाय के समक्ष भी प्रस्तुत किए गए थे।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय सैनिकों के साहस और स्थानीय नागरिकों के सहयोग को जाता है। यह ऑपरेशन भारतीय सेना के इतिहास में मील का पत्थर बन गया है। ऑपरेशन सिंदूर का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखा गया था और इसे महिलाओं को समर्पित किया गया था। सेनाध्यक्ष ने कहा कि यह नाम इसलिए चुना गया क्योंकि हर महिला जब अपनी मांग में सिंदूर लगाती है, तो उसमें उन सैनिकों का बलिदान भी समाहित होता है जिन्होंने देश की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सेनाध्यक्ष ने जानकारी दी कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 7 टारगेट भारतीय सेना और 2 टारगेट वायुसेना द्वारा नष्ट किए गए थे। इस पूरे ऑपरेशन की खास बात यह थी कि इसमें सिर्फ आतंकी ठिकानों, उनके ट्रेनिंग सेंटरों और आकाओं को निशाना बनाया गया, जबकि आम नागरिकों और सैन्य ठिकानों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि भारत ने पूरी दुनिया को इस ऑपरेशन के सबूत दिखाए, ताकि पाकिस्तान सच्चाई छुपा न सके।
कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर 1.0 में उल्लेखनीय योगदान देने वाले तीन अधिकारियों—बीएसएफ की 140वीं बटालियन के कमांडेंट प्रभाकर सिंह, राजपुताना राइफल्स के मेजर रितेश कुमार और हवलदार मोहित गैरा को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
जनरल द्विवेदी ने अंत में कहा कि भारत पूरी तरह तैयार है। इस बार की कार्रवाई इतनी निर्णायक होगी कि पाकिस्तान को यह सोचना पड़ेगा कि क्या उसे इतिहास में भूगोल पर रहना है या नहीं।
















































































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