दिल्ली में जमीन और घर खरीदना होगा महंगा, सरकार ने सर्किल रेट बढ़ाने की प्रक्रिया की शुरू!
राजधानी दिल्ली में जमीन या घर खरीदना अब पहले से महंगा हो सकता है। दिल्ली सरकार ने संपत्ति के सर्किल रेट में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसको लेकर बुधवार को राजस्व विभाग के संभागीय आयुक्त की ओर से सार्वजनिक नोटिस जारी किया गया, जिसमें लोगों से राय और सुझाव मांगे गए हैं।
इस नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि सरकार राजधानी के विभिन्न इलाकों में मौजूदा बाजार कीमतों और वर्तमान सर्किल रेट के बीच के अंतर को कम करने के लिए यह कदम उठा रही है। इस बदलाव का उद्देश्य न केवल संपत्ति लेनदेन में पारदर्शिता लाना है, बल्कि राजस्व वृद्धि को भी सुनिश्चित करना है।
आठ श्रेणियों में बंटी दिल्ली
दिल्ली को इस प्रस्तावित संशोधन के तहत आठ श्रेणियों – ग्रेड A से ग्रेड H में विभाजित किया गया है।
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ग्रेड A में दिल्ली के सबसे पॉश और महंगे इलाके जैसे वसंत विहार, डिफेंस कॉलोनी, ग्रेटर कैलाश आदि शामिल हैं।
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वहीं, ग्रेड H में ग्रामीण और कम विकसित क्षेत्र आते हैं, जहां प्रॉपर्टी की कीमत अपेक्षाकृत कम होती है।
दिल्ली में कृषि भूमि का सर्किल रेट वर्ष 2008 के बाद और आवासीय कॉलोनियों का सर्किल रेट 2014 के बाद से नहीं बढ़ाया गया है। इससे पहले 2023 में भी पिछली सरकार ने सर्किल रेट संशोधन की प्रक्रिया शुरू की थी और प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा गया था, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिल सकी थी।
सर्किल रेट का महत्व
सर्किल रेट वह न्यूनतम मूल्य होता है, जिस पर किसी संपत्ति की रजिस्ट्री की जाती है। इससे कम कीमत पर संपत्ति का पंजीकरण नहीं किया जा सकता। यह दर सरकार द्वारा तय की जाती है और इसका उद्देश्य संपत्ति लेनदेन में पारदर्शिता लाना और कालाधन के उपयोग को रोकना होता है। सर्किल रेट बढ़ने से स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री फीस बढ़ेगी, जिससे सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा।
लोगों से सुझाव मांगे गए
सरकार ने सभी रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, प्रॉपर्टी मालिकों, उद्योग संगठनों और आम जनता से अपील की है कि वे सर्किल रेट संशोधन पर अपने सुझाव भेजें। इसके लिए ईमेल आईडी
📧 suggestionondelhicirclerates@gmail.com
जारी की गई है। इच्छुक लोग 15 दिनों के भीतर अपने सुझाव और आपत्तियां भेज सकते हैं।
एक अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया कि सुझावों की समीक्षा के बाद सरकार प्रस्तावित संशोधित दरें पेश करेगी। उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ महीनों में यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और नई दरें लागू कर दी जाएंगी।
इस बदलाव के बाद दिल्ली में प्रॉपर्टी खरीदने वाले लोगों को अधिक खर्च करना पड़ सकता है, लेकिन इससे रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ने की संभावना भी है।
















































































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