भारत-ब्रिटेन संबंधों को नई ऊंचाई: पीएम मोदी और कीर स्टार्मर की मुलाकात से मजबूत हुआ रणनीतिक साझेदारी का विजन!
मुंबई – भारत और ब्रिटेन के बीच रणनीतिक, व्यापारिक और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने के लिए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस बैठक को दोनों देशों के रिश्तों में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां साझा लोकतांत्रिक मूल्यों की नींव पर विजन 2035 रोडमैप को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा, “भारत-ब्रिटेन के बीच संबंधों की बुनियाद में लोकतंत्र है। हमारे व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) से आयात लागत में कमी, रोजगार के नए अवसर और व्यापारिक विकास होगा, जिससे दोनों देशों के उपभोक्ताओं और उद्योगों को फायदा मिलेगा।”
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अमेरिका की टैरिफ नीतियों के कारण अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। ऐसे में भारत और ब्रिटेन की यह साझेदारी स्थिरता और विश्वसनीयता का संदेश देती है।
प्रधानमंत्री स्टार्मर ने भी इस ऐतिहासिक समझौते को "एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि विकास का लॉन्चपैड" करार दिया। उन्होंने कहा, “हम एक नई, आधुनिक साझेदारी बना रहे हैं जो भविष्य के अवसरों पर केंद्रित है। भारत के साथ हुआ यह समझौता किसी भी देश द्वारा किया गया सबसे बेहतरीन व्यापार समझौता है।”
स्टार्मर इस यात्रा पर 125 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आए हैं, जिसमें ब्रिटेन के शीर्ष व्यापारी, उद्यमी और विश्वविद्यालयों के कुलपति शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत के साथ तेज़ और सस्ते व्यापार से ब्रिटिश लोगों के लिए अधिक रोजगार, विकल्प और स्थिरता आएगी।
इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी और स्टार्मर ने इंडिया-यूके सीईओ फोरम और आगामी ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025 में भाग लेने की घोषणा की, जहां दोनों देशों के बीच निवेश और नवाचार के नए आयामों पर चर्चा होगी।
ब्रिटिश सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि दोनों देशों के नेता कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), दूरसंचार और रक्षा प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि भारत, जो 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है, वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में प्रमुख भूमिका निभाएगा। अनुमान है कि 2030 तक भारत का प्रौद्योगिकी क्षेत्र एक लाख करोड़ पाउंड तक का मूल्य हासिल कर लेगा।
निष्कर्ष:
स्टार्मर की यह भारत यात्रा केवल औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि गहराते विश्वास और साझा दृष्टिकोण का प्रतीक है। सीईटीए समझौते के क्रियान्वयन और तकनीकी सहयोग के विस्तार के साथ भारत-ब्रिटेन संबंधों में एक नया अध्याय शुरू हो गया है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक मंच पर दोनों देशों की साझेदारी को मजबूती देगा।
















































































Leave Your Message