बिहार चुनाव 2025: प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने घोषित की पहली लिस्ट, रितेश पांडेय और वाईवी गिरी जैसे चर्चित नाम शामिल
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों में तेज़ी आ गई है, और इस बार चर्चा का केंद्र बनी है प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी, जिसने सबसे पहले अपने 51 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस लिस्ट में जहां राजनीतिक अनुभव वाले नामों को जगह दी गई है, वहीं कला, समाजसेवा और कानून जगत से भी कुछ चर्चित चेहरों को टिकट देकर पार्टी ने साफ संदेश दिया है – "साफ नीयत, नया नेतृत्व"।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने कहा, “हमने राज्य में सबसे पहले उम्मीदवारों की सूची जारी करने का फैसला लिया है, ताकि जनता को स्पष्टता और विकल्प दोनों मिल सकें। हमारी पार्टी अच्छे लोगों की पार्टी है, और यह लिस्ट इसका प्रमाण है।”
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने बताया कि उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक संतुलन का पूरा ध्यान रखा गया है। पहली सूची में:
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7 सुरक्षित सीटों,
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17 अतिपिछड़ा वर्ग,
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11 पिछड़ा वर्ग,
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8-9 अल्पसंख्यक उम्मीदवार,
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और अन्य सामान्य वर्ग के नाम शामिल किए गए हैं।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि 11 अक्टूबर से पार्टी अपना चुनाव अभियान शुरू करेगी, जिसकी शुरुआत खुद प्रशांत किशोर राघोपुर से करेंगे।
🌟 लिस्ट में ये चेहरे सबसे ज़्यादा चर्चा में
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वाईवी गिरी (मांझी) – सुप्रीम कोर्ट के वकील और सामाजिक कार्यकर्ता
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रितेश पांडेय (करगहर) – भोजपुरी फिल्म स्टार और गायक
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प्रीति किन्नर (भोरे) – ट्रांसजेंडर समुदाय से आईं पहली प्रमुख उम्मीदवार
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आरके मिश्रा (दरभंगा) – चर्चित सामाजिक नेता
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डॉ. शशिशेखर सिन्हा (गोपालगंज) – वरिष्ठ डॉक्टर और सामाजिक सेवा में सक्रिय
🗳️ अन्य प्रमुख उम्मीदवारों के नाम:
दीर्घ नारायण प्रसाद (वाल्मीकिनगर), मोहम्मद परवेज आलम (बेनीपट्टी), रामप्रवेश यादव (निर्मली), अबू अफाक फारुक (कोचाधामन), सुरेन्द्र यादव (सिमरी बख्तियारपुर), शमीम अख्तर (महिषी), चंदन मेहता (सोनपुर), लता सिंह (अस्थावा), प्रो. केसी सिन्हा (कुम्हरार), डॉक्टर विजय गुप्ता (आरा), नेहा नटराज (चेनारी) और अर्चना चंद्रा यादव (नवीनगर) समेत कई और।
📌 निष्कर्ष
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने चुनावी रणभेरी फूंक दी है। अपने उम्मीदवारों की सूची में विविधता, प्रतिनिधित्व और नये चेहरों को जगह देकर पार्टी ने बिहार की राजनीति में "नई सोच, नया विकल्प" की नींव रखने की कोशिश की है। अब देखना यह होगा कि जनता इस बदलाव की बयार को किस हद तक स्वीकारती है।
















































































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