बिहार चुनाव 2025: सीट बंटवारे में उलझे NDA और महागठबंधन, भीतर ही भीतर फूट का खतरा!
जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखें नजदीक आ रही हैं, राज्य की सियासत में हलचल तेज होती जा रही है। मैदान में उतरने से पहले ही दोनों प्रमुख गठबंधन—NDA और महागठबंधन—भीतरू मतभेदों से जूझ रहे हैं। सीट बंटवारे को लेकर जिस तरह की तनातनी चल रही है, वह आने वाले चुनाव को बेहद दिलचस्प और जटिल बना रहा है।
NDA में चिराग की चुनौती: "सम्मान चाहिए, सीट नहीं तो फाइट!"
NDA गठबंधन में सबसे बड़ी सिरदर्दी बनकर उभरे हैं चिराग पासवान और उनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास)।
चिराग ने कम से कम 40 सीटों की मांग ठोंक दी है, जिससे भाजपा और जेडीयू दोनों असहज हो गए हैं।
चिराग का दावा है कि एलजेपी अब "किंगमेकर" की भूमिका निभाने की स्थिति में है और वो सिर्फ चुनावी “सज्जा” नहीं बल्कि निर्णायक शक्ति बनना चाहते हैं।
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उन्होंने अपने नारे “बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट” के साथ जनसभाएं तेज कर दी हैं।
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भाजपा का रुख है कि सीट बंटवारा जमीनी ताकत के आधार पर होना चाहिए।
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जेडीयू चाहती है कि एलजेपी को सीमित सीटें देकर वोट बैंक को बिखरने से बचाया जाए।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा जल्द ही दिल्ली में अपने शीर्ष नेताओं के साथ बैठक कर सीट बंटवारे का अंतिम फॉर्मूला तय करेगी।
चिराग का संदेश साफ है: "हम NDA का हिस्सा हैं और रहेंगे, लेकिन सम्मानजनक हिस्सेदारी नहीं मिली तो अपनी राह भी अलग कर सकते हैं।"
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चिराग की मांग नहीं मानी गई, तो वह कुछ सीटों पर “फ्रेंडली फाइट” के नाम पर NDA को सीधे नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।
महागठबंधन में भी दरार: कांग्रेस की तेजस्वी को डेडलाइन
उधर महागठबंधन भी सीट बंटवारे की जंग से अछूता नहीं है।
कांग्रेस ने आरजेडी को 12 अक्टूबर की डेडलाइन दे दी है—अगर तब तक बात नहीं बनी, तो 13 अक्टूबर से उम्मीदवारों की घोषणा और नामांकन शुरू कर देगी।
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कांग्रेस बिस्फी, बिहार शरीफ, और निर्मली जैसी सीटों की मांग कर रही है।
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वहीं, आरजेडी कहलगांव सीट पर अड़ी है, जिसे कांग्रेस किसी भी हाल में छोड़ना नहीं चाहती।
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इसी बीच अशोक गहलोत, भूपेश बघेल और जयराम रमेश जैसे बड़े कांग्रेस नेताओं की लालू और तेजस्वी से मुलाकात नहीं हो पाना, इस तनाव को और हवा दे रहा है।
समान संकट, अलग खेमे
NDA और महागठबंधन दोनों इस समय आंतरिक दबाव और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से जूझ रहे हैं:
| पहलू | NDA | महागठबंधन |
|---|---|---|
| मुख्य मतभेद | चिराग पासवान की सीट मांग | कांग्रेस-आरजेडी में सीट विवाद |
| किस पर असर | भाजपा-जेडीयू समीकरण | तेजस्वी की नेतृत्व क्षमता |
| संभावित परिणाम | फ्रेंडली फाइट से वोट कट सकता है | कांग्रेस अलग राह चुन सकती है |
क्या है आगे का रास्ता?
अगर सीट बंटवारे को लेकर समय रहते समझौता नहीं हुआ, तो दोनों खेमों में बगावत, फ्रेंडली फाइट या यहां तक कि गठबंधन टूटने तक की नौबत आ सकती है।
ऐसे में बिहार का 2025 चुनाव सिर्फ दो खेमों के बीच नहीं, बल्कि इन खेमों के भीतर छिपे असंतोष और सत्ता की होड़ का भी निर्णायक संग्राम होगा।
बिहार की राजनीति में कहावत है—“जो बैठकों में हारता है, वो चुनाव में नहीं जीतता।”
अब देखना है कि कौन इस सियासी शतरंज की बाज़ी सही चाल से खेलता है, और कौन मात खाता है।
निष्कर्ष:
बिहार चुनाव 2025 नजदीक है, लेकिन गठबंधनों की “भीतरी लड़ाई” ही इनके लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही है।
जो अपने साथियों को साध लेगा, वही जनता को साधने की दौड़ में आगे रहेगा।
















































































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