पश्चिम बंगाल में नगर निकाय भर्ती घोटाला: मंत्री सुजीत बोस के ठिकानों पर ED की छापेमारी, राजनीतिक भूचाल के संकेत!
पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में आ गई है। इस बार निशाने पर हैं तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के मंत्री सुजीत बोस। शुक्रवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीमों ने कोलकाता और उसके आसपास के छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी।
क्या है मामला?
ईडी की यह कार्रवाई नगर निकाय भर्ती घोटाले से जुड़ी है, जिसमें विभिन्न नगरपालिका क्षेत्रों में हुई नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
मंत्री सुजीत बोस पर आरोप है कि 2010 से 2021 के बीच जब वे दक्षिण दमदम नगर पालिका के उपाध्यक्ष थे, उस दौरान भर्तियों में नियमों की अनदेखी की गई और सिफारिशों के आधार पर पद भरे गए।
छापेमारी कहां हुई?
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साल्ट लेक स्थित मंत्री का आवास-सह-कार्यालय
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दमदम नगर पालिका के पूर्व अधिकारियों के ठिकाने
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दक्षिण दमदम नगर पालिका के वर्तमान उपाध्यक्ष निताई दत्ता के आवास
ईडी सूत्रों के मुताबिक, आज की छापेमारी “अचानक” की गई और मंत्री का कार्यालय पहले से सूची में शामिल नहीं था, लेकिन मौके की जानकारी के आधार पर टीम ने वहां भी तलाशी ली।
क्यों जरूरी थी यह छापेमारी?
ईडी का दावा है कि उसका मकसद है भ्रष्टाचार से जुड़े अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत इकट्ठा करना।
मंत्री सुजीत बोस पहले भी इस मामले में जनवरी 2024 में 12 घंटे की पूछताछ का सामना कर चुके हैं।
अब माना जा रहा है कि जांच अपने नतीजों की ओर तेजी से बढ़ रही है।
CBI भी कर रही समानांतर जांच
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7 जून 2024 को सीबीआई ने नदिया, हुगली और उत्तर 24 परगना के 16 से ज्यादा स्थानों पर छापे मारे थे।
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सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2023 में इस मामले में CBI जांच को चुनौती देने वाली बंगाल सरकार की याचिका खारिज कर दी थी, जिससे जांच को वैधानिक बल मिला।
हमला भी हुआ था ईडी अधिकारियों पर
इससे पहले इसी मामले में जब ईडी अधिकारियों ने छापेमारी की थी, तब उन पर शारीरिक हमला भी किया गया था और उनके वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। यह दिखाता है कि जांच एजेंसियों को कितना प्रतिरोध झेलना पड़ रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया क्या हो सकती है?
इस छापेमारी के बाद एक बार फिर केंद्र बनाम राज्य की सियासत गरमा सकती है।
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तृणमूल कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दे सकती है।
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भाजपा और विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बताकर सरकार को कठघरे में खड़ा कर सकते हैं।
निष्कर्ष
नगर निकाय भर्ती घोटाले में ईडी की ताजा छापेमारी यह संकेत देती है कि जांच अब ऊपरी स्तर की सियासी जिम्मेदारियों तक पहुंचने लगी है।
मंत्री सुजीत बोस जैसे वरिष्ठ नेताओं पर शिकंजा कसना इस बात की ओर इशारा करता है कि कथित भ्रष्टाचार पर केंद्र सरकार की एजेंसियां अब सख्त रवैया अपनाए हुए हैं।
आने वाले दिनों में इस मामले में गिरफ्तारियों और चार्जशीट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही, बंगाल की सियासत में यह मुद्दा चुनावी हथियार भी बन सकता है।
















































































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