लालू परिवार पर कोर्ट का शिकंजा कसता गया: 'लैंड फॉर जॉब' मामले में तय हुए आरोप, चुनावी दौर में RJD के लिए बड़ा झटका!
बिहार में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के लिए कानूनी मोर्चे पर एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। बहुचर्चित 'लैंड फॉर जॉब' घोटाले में दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। अब इस मामले में बाकायदा मुकदमा चलेगा।
कोर्ट में पेश हुए लालू परिवार, राजनीतिक माहौल गरमाया
सोमवार की सुबह कोर्ट परिसर का माहौल पूरी तरह से राजनीतिक हो गया, जब लालू यादव व्हीलचेयर पर कोर्ट पहुंचे। उनके साथ राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और वरिष्ठ नेता प्रेमचंद गुप्ता भी मौजूद थे। मीडिया की नजरें भी पूरी तरह से इस केस पर टिकी रहीं। लालू यादव रविवार को ही दिल्ली पहुंच गए थे और अपनी बेटी मीसा भारती के सरकारी आवास पर रुके थे।
सीबीआई का आरोप: नौकरी के बदले जमीन
CBI ने अदालत को बताया कि 2004 से 2009 के बीच, जब लालू यादव केंद्र में रेल मंत्री थे, तब रेलवे में ग्रुप-D की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों से जमीन लालू परिवार के नाम पर बेहद कम कीमतों पर ली गई। एजेंसी का दावा है कि यह पूरी साजिश सुनियोजित थी और इसमें परिवार के कई सदस्य और करीबी लोग लाभान्वित हुए।
मई 2022 में CBI ने चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें कुल 16 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें लालू, राबड़ी, तेजस्वी, मीसा भारती, तेज प्रताप और हेमा यादव जैसे परिवार के सदस्य शामिल हैं।
पहले भी घिरे हैं कानूनी मामलों में
यह पहली बार नहीं है जब लालू परिवार कानूनी शिकंजे में आया हो। इससे पहले IRCTC घोटाले में भी पूरा परिवार आरोपी बन चुका है। लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, कोचर बंधु और कई कारोबारी इसमें फंसे हैं।
चुनावी असर और सियासी प्रतिक्रिया
बिहार में विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है, ऐसे में यह केस RJD के लिए राजनीतिक रूप से बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता है। विपक्ष पहले ही इसे “भ्रष्टाचार की मिसाल” बताकर हमला बोल रहा है।
वहीं तेजस्वी यादव ने अदालत से बाहर कहा:
“हम कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन यह सब बीजेपी की साजिश है। उन्हें डर है कि जनता उन्हें सत्ता से बाहर कर देगी, इसलिए इस तरह के मामलों को हवा दी जा रही है।”
क्या असर पड़ेगा चुनाव पर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह का मामला सामने आना RJD की चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकता है। एक ओर जहां RJD “सहानुभूति की लहर” बनाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को पूरी ताकत से उठाने की तैयारी में है।
















































































Leave Your Message