दुर्गापुर गैंगरेप मामला: सुवेंदु अधिकारी का तृणमूल पर गंभीर आरोप, बोले — "मुख्य आरोपी टीएमसी से जुड़ा", पीड़िता की हालत स्थिर!

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में एक द्वितीय वर्ष की मेडिकल छात्रा के साथ हुए सामूहिक बलात्कार मामले ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस संवेदनशील घटना को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

टीएमसी से आरोपी का संबंध: सुवेंदु अधिकारी का दावा

13 अक्टूबर को दुर्गापुर पहुंचकर सुवेंदु अधिकारी ने पीड़िता के माता-पिता और इलाज कर रहे डॉक्टरों से मुलाकात की। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा:

“यह न सिर्फ अपराध है, बल्कि तृणमूल कांग्रेस द्वारा फैलाए गए आतंक का नतीजा है। एक आरोपी का संबंध सीधे टीएमसी से है, और मुख्य आरोपी अब तक फरार है। पीड़िता के माता-पिता उसे एम्स भुवनेश्वर ले जाना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें राज्य की व्यवस्था पर भरोसा नहीं है।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि न्याय की कोई उम्मीद नहीं है जब सत्ता पक्ष स्वयं अपराधियों को सुरक्षा कवच दे रहा हो।


अब तक चार गिरफ्तार, एक आरोपी अभी भी फरार

इस मामले में पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सोमवार को गिरफ्तार चौथा आरोपी दुर्गापुर नगर निगम में अस्थायी कर्मचारी बताया जा रहा है। उसे न्यायालय में पेश कर पुलिस ने उसकी हिरासत की मांग की है।

पुलिस के अनुसार, रविवार की रात को यह गिरफ्तारी हुई, जबकि अन्य तीन आरोपियों को पहले ही 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा जा चुका है। मामले में एक मुख्य आरोपी अभी भी फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है।


ममता बनर्जी का बयान: “किसी को बख्शा नहीं जाएगा”

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस जघन्य वारदात पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने रविवार (12 अक्टूबर) को कहा:

“यह एक स्तब्ध कर देने वाली घटना है। हमारा रुख स्पष्ट है — ऐसे अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और शेष की तलाश जारी है। किसी को भी छोड़ा नहीं जाएगा।”


राजनीति बनाम न्याय की लड़ाई

जहां मुख्यमंत्री सख्त कार्रवाई का भरोसा दिला रही हैं, वहीं विपक्ष — खासकर भाजपा — इसे कानून-व्यवस्था की विफलता और राजनीतिक संरक्षण से जोड़कर देख रहा है। सुवेंदु अधिकारी का यह आरोप कि आरोपी का संबंध टीएमसी से है, मामले को राजनीतिक रूप से और अधिक संवेदनशील बना रहा है।

अब सवाल यह है कि क्या पुलिस दबाव से मुक्त होकर सभी आरोपियों को निष्पक्ष रूप से गिरफ्तार कर पाएगी? और क्या पीड़िता को जल्द और पूरा न्याय मिलेगा?

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