इलाहाबाद हाईकोर्ट से समाजवादी नेता इरफान सोलंकी को बड़ी राहत, जाजमऊ जमीन कब्जा मामले में कार्रवाई पर रोक!

उत्तर प्रदेश के कानपुर से समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और सीसामऊ से पूर्व विधायक इरफान सोलंकी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस समीर जैन की सिंगल बेंच ने वर्ष 2022 में दर्ज रंगदारी, मारपीट और ज़मीन कब्जा के मामले में अगली सुनवाई तक ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

यह फैसला गुरुवार को सुरक्षित रखा गया था, जिसे शुक्रवार (13 अक्टूबर) को सुनाया गया। हाईकोर्ट के इस आदेश से इरफान सोलंकी को कानूनी लड़ाई में बड़ी राहत मिली है और उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।


क्या है मामला?

पूरा मामला दिसंबर 2022 का है, जब जाजमऊ थाना क्षेत्र में रहने वाले विमल कुमार ने एफआईआर दर्ज करवाई थी। आरोप था कि इरफान सोलंकी, बिल्डर हाजी वसी, शाहिद लारी और कमर आलम ने मिलकर उनकी लगभग 1000 वर्ग मीटर ज़मीन पर जबरन कब्जा कर लिया था।

विमल कुमार ने आरोप लगाया कि:

  • आरोपियों ने उनकी जमीन पर कब्जा कर बाउंड्री वॉल गिरा दी।

  • जमीन छोड़ने के लिए उनसे रंगदारी मांगी गई।

  • विरोध करने पर गाली-गलौज और मारपीट की गई।

  • मामले में धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी जैसी गंभीर धाराएं लगाई गईं।


कोर्ट में क्या हुआ?

  • इरफान सोलंकी ने इस मामले को लेकर ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई रद्द करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

  • उनके वकीलों ने तर्क दिया कि यह पूरा मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है और आरोप निराधार हैं।

  • कोर्ट ने उनके पक्ष को सुनने के बाद ट्रायल कोर्ट की संपूर्ण कार्यवाही पर रोक लगा दी है।


लगातार मिल रही राहतें

गौरतलब है कि इरफान सोलंकी सितंबर 2025 में गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज एक अन्य मामले में जमानत पर रिहा हुए थे। अब उन्हें एक और पुराने मामले में हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई है।


कौन हैं इरफान सोलंकी?

  • इरफान सोलंकी समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता हैं।

  • कानपुर की सीसामऊ विधानसभा सीट से चार बार विधायक रह चुके हैं।

  • वर्तमान में उनकी पत्नी नसीम सोलंकी सीसामऊ से सपा विधायक हैं।

  • सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बेहद करीबी नेताओं में गिने जाते हैं।

  • मुस्लिम समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ है, खासकर कानपुर और आसपास के इलाकों में।


इस फैसले से साफ है कि इरफान सोलंकी को कानूनी प्रक्रिया में थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन जमीन कब्जा और रंगदारी जैसे गंभीर आरोपों की जांच आगे कैसे होती है, इस पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।

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