नेहा सिंह राठौर को सुप्रीम कोर्ट से झटका, FIR रद्द करने की याचिका खारिज — अब चलेगा ट्रायल!
गायिका और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट नेहा सिंह राठौर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने पहलगाम आतंकी हमले से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में उनके खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि वह इस स्टेज पर दखल देने के लिए तैयार नहीं है, जिससे अब नेहा को ट्रायल का सामना करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट का रुख सख्त
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई शामिल थे, ने स्पष्ट किया कि याचिका पर इस समय कोई राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा:
"हम इस चरण पर हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं। याचिकाकर्ता ट्रायल कोर्ट में अपनी दलीलें पेश कर सकती हैं।"
क्या है पूरा मामला?
यह मामला नेहा सिंह राठौर द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे माहौल बिगड़ सकता था।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें शामिल हैं:
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धारा 196, 197, 152, 353
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आईटी एक्ट की धारा 69A
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और बाद में इसमें देशद्रोह से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी गईं।
नेहा की दलील: सोशल मीडिया पोस्ट को साजिश बताना गलत
नेहा सिंह राठौर ने सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल के माध्यम से याचिका दायर कर कहा कि:
“केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर मुझे 'देश के खिलाफ साजिश' जैसे संगीन आरोपों में फंसाया जा रहा है, जो संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन है।”
सिब्बल ने यह भी कहा कि नेहा ट्रायल का सामना करने को तैयार हैं लेकिन बगावत (देशद्रोह) जैसी गंभीर धाराएं नहीं लगाई जानी चाहिए थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने इस दलील पर कोई तत्काल राहत नहीं दी और कहा:
"आप ये सभी बातें ट्रायल के दौरान या चार्ज फ्रेमिंग के समय कह सकते हैं। अभी हम इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगे।"
अब क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब नेहा सिंह राठौर को निचली अदालत में मुकदमे का सामना करना होगा। जांच एजेंसियां अब अपनी प्रक्रिया पूरी करेंगी और चार्जशीट दाखिल करेंगी। वहीं, नेहा को या तो जमानत पर रहना होगा या न्यायिक प्रक्रिया का पूरा पालन करना होगा।
निष्कर्ष:
यह मामला अभिव्यक्ति की आज़ादी बनाम राष्ट्र की सुरक्षा के बीच की सीमा रेखा को लेकर अहम बनता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बताता है कि देशद्रोह जैसे मामलों में फैसला जल्दबाज़ी में नहीं, प्रक्रिया के तहत होगा। अब नजरें ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई पर होंगी कि नेहा के खिलाफ आरोप टिकते हैं या नहीं।
















































































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