RSS पर बैन की मांग से गरमाई सियासत: प्रियांक खड्गे के बयान ने कांग्रेस को घेरा, BJP का तीखा हमला!
कर्नाटक की राजनीति में एक नया विवाद गहराता जा रहा है, जिसकी वजह बने हैं कांग्रेस नेता और राज्य सरकार में मंत्री प्रियांक खड्गे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए खड्गे ने एक ऐसी बहस छेड़ दी है, जो अब कर्नाटक से निकलकर राष्ट्रीय सियासत का मुद्दा बन चुकी है।
क्या कहा प्रियांक खड्गे ने?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड्गे के बेटे और कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड्गे ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर मांग की है कि RSS की गतिविधियों पर रोक लगाई जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संगठन “भारत की एकता, अखंडता और धर्मनिरपेक्षता के लिए खतरा” बन चुका है। उन्होंने यह भी दावा किया कि RSS सरकारी स्कूलों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर शाखाएं चलाकर बच्चों में “नकारात्मक और विभाजनकारी विचारधारा” भर रहा है।
बीजेपी का पलटवार – “नौटंकी और प्रचार का हथकंडा”
BJP ने इस बयान को कांग्रेस की राजनीतिक नौटंकी बताया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "प्रियांक जैसे नेताओं को कोई गंभीरता से नहीं लेता, इसलिए वो सुर्खियों में आने के लिए ऐसे बयान देते हैं।"
उन्होंने इंदिरा गांधी के आपातकाल का हवाला देते हुए कहा,
"उन्होंने भी RSS पर बैन लगाया था, और उसका अंजाम सबके सामने है – सत्ता गंवानी पड़ी थी।"
फडणवीस ने प्रियांक खड्गे को निशाने पर लेते हुए कहा कि उनकी राजनीति “पिता के कंधों पर टिकी” है और ऐसे नेताओं को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।
कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता vs बीजेपी राष्ट्रभक्ति
जहां कांग्रेस इसे धर्मनिरपेक्षता की रक्षा का प्रयास बता रही है, वहीं BJP इस बयान को राष्ट्रभक्ति और हिंदू विचारधारा पर हमला करार दे रही है। पार्टी के कई नेताओं ने कांग्रेस पर “हिंदू विरोधी एजेंडा” चलाने और “वोट बैंक की राजनीति” के लिए संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
राजनीतिक विश्लेषण: कांग्रेस के लिए नया संकट?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि खड्गे का यह बयान कांग्रेस के लिए बैकफायर कर सकता है, खासकर हिंदी पट्टी और दक्षिण भारत में, जहां RSS की मजबूत उपस्थिति है। कांग्रेस पहले से ही “हिंदू विरोधी” टैग से जूझती रही है, और यह बयान उसी धारणा को और मजबूत कर सकता है।
दूसरी ओर, BJP इस मुद्दे को भुनाने में जुट गई है और इसे 2024 में कांग्रेस की रणनीतिक गलती की तरह पेश करने की कोशिश कर रही है।
निष्कर्ष:
प्रियांक खड्गे के बयान ने कांग्रेस को मुश्किल में डाल दिया है। जहां पार्टी खुद को धर्मनिरपेक्षता की रक्षक बताने में जुटी है, वहीं RSS के समर्थन में खड़ी BJP इसे राष्ट्रभक्ति और हिंदू पहचान का सवाल बना रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा कर्नाटक से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।
















































































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