सेना पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, सुनवाई पर रोक 20 नवंबर तक बढ़ी।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से एक बार फिर अंतरिम राहत मिली है। सेना पर कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ की निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक को अब 20 नवंबर 2025 तक के लिए बढ़ा दिया है। यह मामला राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा (2022) के दौरान दिए गए एक बयान से जुड़ा है, जिसमें उन पर सेना को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और फैसला
13 अक्टूबर 2025 को, जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने यह आदेश जारी किया। बेंच ने याचिकाकर्ता (राहुल गांधी) के वकील द्वारा प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगने के अनुरोध को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 20 नवंबर तय की। इसके साथ ही कोर्ट ने 4 अगस्त को दी गई अंतरिम रोक को भी जारी रखने का आदेश दिया।
मामला क्या है?
यह मामला लखनऊ की एक अदालत में दर्ज शिकायत से जुड़ा है, जिसमें राहुल गांधी पर आरोप है कि उन्होंने सेना के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की। यह टिप्पणी उन्होंने 2022 में अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दी थी।
इस मामले में राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 29 मई 2025 के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने निचली अदालत की ओर से जारी समन को रद्द करने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी से पूछे थे तीखे सवाल
4 अगस्त को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को कड़ी फटकार लगाई थी। बेंच ने पूछा:
"आपको कैसे पता चला कि 2,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर चीन ने कब्जा कर लिया है? क्या आप वहां थे? आपके पास क्या सबूत है?"
बेंच ने आगे कहा:
"बिना प्रमाण के इस तरह के बयान क्यों दे रहे हैं? अगर आप सच्चे भारतीय हैं, तो आप ऐसा नहीं कहेंगे।"
इस पर कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।
क्या आगे हो सकता है?
20 नवंबर को अगली सुनवाई में यह देखा जाएगा कि क्या सुप्रीम कोर्ट इस अंतरिम रोक को जारी रखेगा, मामले को खारिज करेगा या निचली अदालत की कार्यवाही को फिर से शुरू करने की इजाजत देगा। साथ ही, कोर्ट यह भी देखेगा कि राहुल गांधी की याचिका में कितनी कानूनी मजबूती है।
राजनीतिक मायने
यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है। सेना पर टिप्पणी जैसे मुद्दों पर विपक्षी नेताओं को अक्सर तीखी आलोचना का सामना करना पड़ता है। राहुल गांधी की छवि और कांग्रेस की रणनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है, खासकर जब देश में चुनावी माहौल बनने लगे।
















































































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