एनडीए में सीट बंटवारे पर घमासान: जेडीयू विधायकों का विरोध, गोपाल मंडल धरने पर, रत्नेश सदा हुए भावुक!

बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर सीट बंटवारे को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। खासकर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में आंतरिक विरोध के सुर तेज होते जा रहे हैं। पार्टी के दो विधायकों का बगावती रुख गठबंधन की रणनीति के लिए खतरे की घंटी बनता दिख रहा है।


गोपाल मंडल का सीएम आवास के बाहर धरना

भागलपुर के गोपालपुर से जेडीयू विधायक गोपाल मंडल, जिन्हें उनकी बेबाक और विवादास्पद छवि के लिए जाना जाता है, अब खुलकर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मैदान में उतर आए हैं। सोमवार को वे अपने समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर पहुंचे और आरोप लगाया कि उनका टिकट काटने की साजिश हो रही है।

जब उन्हें सीएम आवास में प्रवेश नहीं मिला, तो उन्होंने मुख्यमंत्री आवास के बाहर ही धरना दे दिया। गोपाल मंडल का दावा है कि

“सीएम आवास में बैठे कुछ लोग उन्हें बेटिकट करवाना चाहते हैं। मैं सीधे नीतीश जी से मिलकर बात करना चाहता हूं।”

इस घटनाक्रम से पार्टी की अंदरूनी कलह अब सड़कों पर उतर चुकी है।


रत्नेश सदा की आंखों में आए आंसू

दूसरी ओर, सहरसा जिले के सोनबरसा सीट से विधायक और मंत्री रत्नेश सदा की सीट को लेकर भी विवाद सामने आया है। बताया जा रहा है कि यह सीट चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को दे दी गई है। रत्नेश सदा को जेडीयू का सिंबल भी दिया जा चुका था, लेकिन बाद में उन्हें जानकारी दी गई कि उनकी सीट गठबंधन में एलजेपी के खाते में चली गई है।

इंडिया टीवी से बात करते हुए भावुक हुए रत्नेश सदा ने कहा:

“मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुझे कीचड़ और दलदल से निकालकर मंत्री बनाया। अब मेरी सीट चली गई है। क्षेत्र में भारी नाराजगी है।”

उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े, जो यह दिखाता है कि फैसले ने उन्हें कितना आहत किया है। रत्नेश सदा को नीतीश का भरोसेमंद दलित चेहरा माना जाता है, ऐसे में उनकी सीट जाना जेडीयू के भीतर सामाजिक समीकरणों को भी झटका दे सकता है।


बढ़ती नाराजगी: मांझी और कुशवाहा पहले ही जता चुके हैं विरोध

इससे पहले एनडीए के दो और घटक दल—हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के उपेंद्र कुशवाहा भी सीट बंटवारे को लेकर नाराजगी जता चुके हैं। अब जेडीयू के अंदर से भी विरोध की आवाजें उठने लगी हैं, जो गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रही हैं।


निष्कर्ष:

बिहार एनडीए में सीटों के बंटवारे को लेकर भीतरखाने का असंतोष अब खुले विरोध में बदलता जा रहा है। खासकर जेडीयू जैसी बड़ी सहयोगी पार्टी के विधायकों का इस तरह विरोध में आना नीतीश कुमार और एनडीए दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। जहां गोपाल मंडल की बगावत पार्टी की अनुशासन नीति को चुनौती देती है, वहीं रत्नेश सदा का भावुक होना संगठनात्मक सम्मान और विश्वास की दरार को दर्शाता है।

आने वाले दिनों में अगर नाराजगी शांत नहीं हुई, तो यह एनडीए की सीट-सेटिंग को ही अस्थिर कर सकती है।

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