तेलंगाना में बीसी आरक्षण पर सियासी घमासान: कविता का बीजेपी-कांग्रेस पर हमला, 'श्रद्धांजलि देने जैसी नौटंकी' करार!
तेलंगाना में पिछड़े वर्ग (बीसी) आरक्षण को लेकर सियासत गरमा गई है। बीसी संयुक्त कार्रवाई समिति (JAC) द्वारा बुलाए गए राज्यव्यापी बंद के बीच, बीआरएस नेता और तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष कलवकुंटला कविता ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों पर जोरदार हमला बोला। कविता ने इन दोनों दलों को बीसी समुदाय को धोखा देने वाला करार देते हुए कहा कि इनका बंद में शामिल होना ‘हत्या कर श्रद्धांजलि देने’ जैसा है।
वीडियो बयान में कविता का तीखा हमला
वीडियो संदेश में कविता ने कहा,
“बीसी समुदाय के बच्चे राज्यभर में आरक्षण की मांग कर रहे हैं। लेकिन जिन पार्टियों को यह आरक्षण देना चाहिए था, वे अब कह रही हैं कि वे बंद में शामिल होंगी – यह हास्यास्पद और शर्मनाक है।”
उन्होंने सीधे तौर पर बीजेपी और कांग्रेस को निशाने पर लिया। कविता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने विधानसभा में केवल दिखावे के लिए बिल पास कर केंद्र सरकार पर जिम्मेदारी डाल दी, लेकिन कभी गंभीर दबाव नहीं बनाया। वहीं बीजेपी पर यह कहकर तंज कसा कि वे समर्थन की नौटंकी कर रहे हैं।
कोर्ट का स्टे और कानूनी पेच
गौरतलब है कि तेलंगाना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा बीसी आरक्षण को 42 प्रतिशत तक बढ़ाने के आदेश पर स्टे दे दिया है। कोर्ट ने यह स्टे सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा का हवाला देते हुए लगाया। इस मुद्दे को अब बीजेपी सांसद आर. कृष्णैया के नेतृत्व में बीसी जेएसी ने राष्ट्रीय स्तर पर उठाया है और केंद्र सरकार से विशेष बिल की मांग की जा रही है।
राजनीतिक दलों में जुबानी जंग तेज
इस मुद्दे पर जहां कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रेवंत रेड्डी ने बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया, वहीं बीआरएस वर्किंग प्रेसिडेंट के.टी. रामाराव ने इसे तेलंगाना आंदोलन से जोड़ते हुए एकजुटता की अपील की। बीजेपी ने भी बंद को समर्थन देने की घोषणा की, लेकिन कविता ने इसे साफ तौर पर "नौटंकी" बताया।
बंद का असर और पुलिस अलर्ट
राज्यव्यापी बंद के चलते दुकानें बंद, स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है, हालांकि मेडिकल स्टोर्स खुले रहेंगे। पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी और सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
चुनावी असर तय?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में अहम भूमिका निभा सकता है, क्योंकि बीसी समुदाय का वोट शेयर बड़ा और निर्णायक माना जाता है।
















































































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