पश्चिम बंगाल में SIR से पहले प्रशासनिक फेरबदल – ममता सरकार और चुनाव आयोग आमने-सामने!
चुनाव आयोग की घोषणा से ठीक पहले बड़ा ‘खेला’
पश्चिम बंगाल में विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) की घोषणा से ठीक पहले ममता बनर्जी सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक reshuffle कर दिया है। राज्य सरकार ने एक ही झटके में 527 अधिकारियों का स्थानांतरण किया — जिनमें 67 IAS अधिकारी और 460 राज्य सिविल सेवा अधिकारी शामिल हैं। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब चुनाव आयोग ने SIR का दूसरा चरण घोषित किया है। विपक्ष ने इसे चुनावी हेराफेरी की साज़िश बताया है।
चुनाव आयोग की सख्ती और त्वरित बैठकें
स्थानांतरण की खबर मिलते ही चुनाव आयोग हरकत में आ गया। आयोग ने सभी जिलाधिकारियों (DM) के साथ आपात बैठक बुलाई है। मंगलवार सुबह 10 बजे से वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में वर्चुअल मीटिंग शुरू हो गई, जिसमें राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी और सभी जिलों के डीएम शामिल हैं। इसके बाद आयोग आज ही सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी चर्चा कर रहा है।
SIR अभियान का उद्देश्य और कार्यक्रम
चुनाव आयोग ने सोमवार को SIR के दूसरे चरण की घोषणा की, जिसमें पश्चिम बंगाल सहित 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। इस अभ्यास का उद्देश्य है —
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वोटर लिस्ट से फर्जी नामों को हटाना,
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मृत वोटरों के नाम डिलीट करना,
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दोहरी एंट्री समाप्त करना, और
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प्रवासी वोटरों का डेटा अपडेट करना।
यह प्रक्रिया 28 अक्टूबर से 3 नवंबर तक ट्रेनिंग और प्रिंटिंग के साथ शुरू होगी।
घर-घर सर्वे चार नवंबर से चार दिसंबर तक चलेगा।
ड्राफ्ट लिस्ट नौ दिसंबर को जारी होगी, दावा-आपत्ति की अंतिम तिथि आठ जनवरी 2026 होगी,
और अंतिम मतदाता सूची सात फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि SIR का मकसद “हर योग्य वोटर को शामिल करना और अयोग्य को हटाना” है, और बंगाल सरकार से सहयोग की उम्मीद है।
ममता बनर्जी का विरोध और तीखी प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR को ‘NRC जैसा अभ्यास’ बताते हुए कड़ा विरोध जताया। उन्होंने चुनाव आयोग पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाया और कहा कि “आयोग हमारे अधिकारियों को धमका रहा है।” ममता ने कहा कि यह “लॉलीपॉप सरकार का खेल है” और इससे “राज्य में दंगे भड़क सकते हैं।”
टीएमसी का आरोप है कि SIR के जरिये 1.2 करोड़ वोटरों को हटाने की साजिश रची जा रही है, जिससे पार्टी का वोट बैंक प्रभावित होगा। ममता ने पहले भी बीएलओ मीटिंग को लेकर नाराजगी जताई थी कि वह राज्य सरकार को सूचित किए बिना बुलाई गई।
स्थानांतरण विवाद और विपक्ष का हमला
ममता सरकार ने हालिया आदेश में 14 जिलाधिकारियों सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को बदला है। प्रभावित जिलों में उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, कूच बिहार, मुर्शिदाबाद, पुरुलिया, दार्जिलिंग, मालदा, बीरभूम, झारग्राम और पूर्व मिदनापुर शामिल हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे “रूटीन तबादला” बताया, लेकिन यह कदम SIR की शुरुआत के ठीक बाद उठाया गया, जिससे मामला राजनीतिक हो गया।
भाजपा ने चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज की, यह कहते हुए कि सरकार ने “बिना अनुमति 235 अधिकारियों का तबादला” किया है, जो SIR नियमों का उल्लंघन है। भाजपा नेता सिसिर बाजोरिया ने कहा कि “17 डीएम, 22 एडीएम, 45 एसडीओ और 151 बीडीओ” को बदलना चुनावी हस्तक्षेप है — इसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।
राजनीतिक टकराव के संकेत
यह पूरा विवाद संकेत देता है कि 2026 विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल में राजनीतिक तनाव और बढ़ने वाला है।
जहाँ चुनाव आयोग मतदाता सूची की पारदर्शिता पर ज़ोर दे रहा है, वहीं ममता बनर्जी इसे “राजनीतिक साजिश” मान रही हैं।
SIR प्रक्रिया के साथ-साथ अब प्रशासनिक फेरबदल बनाम चुनावी शुचिता की जंग भी शुरू हो चुकी है।
















































































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