प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार पर साधा निशाना: मनरेगा का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू योजना’ करना समझ से परे, कांग्रेस ने जताई कड़ी आपत्ति!

केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ रखने के फैसले पर कांग्रेस नेता तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि योजना का नाम बदलना समझ से परे है और इससे महात्मा गांधी की पहचान को चोट पहुँच रही है। संसद परिसर में मीडिया से बातचीत में प्रियंका ने सवाल उठाया, “मुझे समझ नहीं आ रहा कि मनरेगा का नाम बदलने के पीछे मोदी सरकार की मानसिकता क्या है?” उन्होंने आगे कहा कि योजना का नाम बदलने में काफी पैसा खर्च होता है और इसका कोई ठोस फायदा नहीं दिखता।

कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने भी प्रियंका गांधी का समर्थन किया और कहा कि गुजरात में कई लोगों का नाम ‘बापू’ है, फिर भी महात्मा गांधी का नाम हटाकर योजना का नाम बदलना समझ से परे कदम है।

मनरेगा, जो सितंबर 2005 में पारित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 के तहत लागू हुई थी, ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को सालाना 100 दिन मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी देती है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

इस साल इस योजना के लिए 86,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा बजट है। वित्त वर्ष 2013-14 में इसके लिए मात्र 33,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। इस वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 45,783 करोड़ रुपए की राशि जारी की जा चुकी है।

प्रियंका गांधी और कांग्रेस नेताओं की आलोचना इस बात पर केंद्रित है कि नाम बदलने का फैसला महात्मा गांधी की पहचान और योजना की ऐतिहासिक महत्वता को कम कर रहा है, जबकि सरकार का दावा है कि यह बदलाव जनता तक योजना की पहुंच बढ़ाने और नए स्वरूप को पेश करने के लिए किया गया है।

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