साइटिका की शुरुआत कैसे होती है, इसके कारण और लक्षण से 'खुद' को कैसे बचाये।

साइटिका, साइटिक नर्व में चोट, कमजोरी या जलन के कारण होने वाली तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारी है। दरअसल, सायटिक नर्व आपके शरीर की सबसे लंबी और मोटी नर्व है। ये 2 सेंटीमीटर तक चौड़ा है जो नसों का एक बंडल जैसा दिखता है और आपकी रीढ़ की हड्डी से निकलने वाली पांच तंत्रिका जड़ों से जुड़ा हुआ है। आपके शरीर का लगभग हर हिस्सा चाहे वो कूल्हा हो, घुटना हो या आपके पैर की उंगलियां हों सब इस एक नर्व से जुड़े हैं। इसलिए, समय के साथ ये बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और सही समय पर इलाज न होने पर शरीर के कई हिस्से बेकामिल हो सकते हैं। तो, आइए जानते हैं इस बीमारी के बारे में विस्तार से।

साइटिका की शुरुआत कैसे होती है?
1. पीठ या बट में झुनझुनी या सुन्नता, 
जब साइटिक नर्व से जुड़ी ये बीमारी शुरू होती है तो सबसे पहले आपकी पीठ या बट में झुनझुनी और सुन्नता का कारण बनती है। होता ये है कि कूल्हों के पास से दर्द और नसों में खिंचाव महसूस होता है और ये बढ़ता जाता है। उठने-बैठने में दिक्कत होती है और यहां तक कि सीधा होकर इंसान सो भी नहीं पाता है।

2.  पैर में लगातार दर्द,
साइटिका की शुरुआत में आपको अपने पैरों में तेज दर्द महसूस हो सकता है और ये लंबे समय तक रह सकता है। ये ऐसा होता है जैसे कि हल्का-हल्का सा दर्द हर समय बना रहे। तो, इस लक्षण को नजरअंदाज न करें और डॉक्टर को दिखाएं। इसके अलावा ये बीमारी पैर की उंगलियों में सुन्नता और झुनझुनी के साथ भी परेशान कर सकती है।

साइटिका के लक्षण, 
-बार-बार हाथों और पैरों का सुन्न होना। 
-घुटना मोड़ने में दिक्कत और इसमें कमजोरी।  
-चलने में दिक्कत। 
-उंगलियों और पीठ के निचले हिस्सों में कमजोरी। 

तो, इन तमाम लक्षणों को नजरअंदाज न करें। डॉक्टर को दिखाएं और समय रहते इस बीमारी का इलाज करवाएं। नहीं तो इसका बढ़ना आपको लंबे समय तक के लिए परेशान कर सकता है। और समय के रहते इलाज कराने से हम बीमारियों को बढ़ने से रोक सकते है। अपने आप को इस गंभीर बीमारी से बचा सकते है।   
 

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