मेरठ लोकसभा में पार्टी आमने-सामने, किसे मिलेगा जनता का जनआदेश।
लोकसभा चुनावों को देखते हुए मेरठ लोकसभा सीट से बीजेपी ने धारावाहिक रामायण में राम का किरदार निभाने वाले अभिनेता अरुण गोविल पर दांव लगाया है। वहीं 'राम' के खिलाफ समाजवादी पार्टी ने जनरल सीट पर दलित वर्ग से आने वाली सुनीता वर्मा को टिकट दिया है। और बहुजन समाज पार्टी ने देवव्रत त्यागी को चुनावी मैदान में उतारा है। मेरठ ऐसी सीट है जहां अखिलेश यादव ने दो बार अपना उम्मीदवार बदला। पहले उन्होंने भानु प्रताप को टिकट दिया और फिर उनका नाम काटकर अतुल प्रधान को टिकट दे दिया। अतुल प्रधान ने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया था। लेकिन उनका भी टिकट काट दिया और 4 अप्रैल को नामांकन दाखिल करने के आखिरी दिन सुनीता वर्मा को मैदान पर उतार दिया। OBC समुदाय से आने वालीं सुनीता वर्मा की छवि भी समाज में साफ-सुथरी है। अखिलेश ने मेरठ के पूर्व मेयर सुनीता वर्मा को टिकट देकर बाजी पलट दी है। अरुण गोविल के सामने सुनीता एक बड़ी चुनौती हैं। सुनीता वर्मा का राजनीतिक सफर डेढ़ दशक पहले जिला पंचायत सदस्य के तौर पर शुरू हुआ था। 2017 में वह बसपा के टिकट पर महापौर का चुनाव लड़ी थीं और बीजेपी प्रत्याशी को हरा दिया था। सुनीता वर्मा को 2 लाख 34 हजार (चौतीस हजार) 817 वोट मिले थे, जबकि बीजेपी की कांता कर्दम को 2 लाख 5 हजार 235 (दो सौ पैतीस ) वोट मिले थे। हालांकि बाद में उन्होंने सपा का दामन थाम लिया था। 2007 में उनके पति योगेश वर्मा भी बसपा के टिकट पर हस्तिनापुर सीट से विधायक रह चुके हैं। 2017 में सुनीता वर्मा को मुस्लिम-दलित समीकरण के सहारे ही जीत मिली थी।
अखिलेश यादव ने शायद इसी समीकरण के सहारे ही सुनीता वर्मा को टिकट दिया है। क्योंकि मेरठ में करीब 9 लाख वोटरों में से ज्यादातर वोटर दलित-मुस्लिम समुदय से बताए जाते हैं। ये मेरठ की कुल जनसंख्या का करीब आधा है।हालांकि बीजेपी ने भी मेरठ में जातीय समीकरण का ख्याल रखा है। मेरठ से अभी राजेंद्र अग्रवाल बीजेपी के सांसद हैं। पार्टी ने अरुण गोविल को मेरठ के लिए इसलिए चुना है। क्योंकि उन्हें भगवान राम का प्रतिनिधि चरित्र और हिंदुत्व का चेहरा माना जाता है। मेरठ में इस बार 2024 का चुनाव सबसे अलग है। मुस्लिम-दलित वोट बैंक पर सपा, बसपा और बीजेपी तीनों कि ही नज़र है। तीनों ही दल सभी समुदाय के लोगों को लुभाने की कोशिश में लगे हैं। मेरठ लोकसभा सीट किस पार्टी के खाते में जाएगी, ये तो 4 जून को चुनाव नतीजे आने के बाद ही साफ होगा।
















































































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