ऐसा 24 वर्ष बाद हो रहा है, जब 'मई' और 'जून' के गर्मियों में नहीं सुनाई देगी शहनाइयों की गूंज। 

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक गुरु और शुक्र तारा के अस्त होने पर शादी जैसे मांगलिक कार्य नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे में शुक्र तारा के अस्त होने से मई और जून महीने में कोई विवाह मुहूर्त नहीं है। 28 अप्रेल से शुक्र ग्रह के अस्त होते ही विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग गया। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक गुरु और शुक्र तारा के अस्त होने पर शादी जैसे मांगलिक कार्य नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे में शुक्र तारा के अस्त होने से मई और जून महीने में कोई विवाह मुहूर्त नहीं है। ढाई महीने के बाद 2 जुलाई से फिर से विवाह मुहूर्त है। ऐसा 24 वर्ष बाद हो रहा है जब मई और जून के गर्मियों में शहनाइयों की गूंज सुनाई नहीं देगी। शुक्र ग्रह अस्त होने पर विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नये व्यापार व्यवसाय प्रारंभ आदि कार्य करने की पूर्ण मनाही रहती है। इसे संसारिक सुख और विलासिता पूर्ण जीवन का आधार भी कहा गया है ऐसे में शुक्र के अस्त होने पर कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। शुक्र वर्ष में विशेष अवधि में अस्त और उदय होता है।

जब कोई ग्रह सूर्य के निकट आ जाता हैए तो उसकी चमक फीकी पड़ जाती है। इस कारण वह आकाश में दिखाई नहीं देता। इसे उस ग्रह का अस्त होना कहते हैं। शुक्र भोग-विलास का नैसर्गिक कारक होने के कारण दांपत्य सुख का प्रतिनिधि होता है। वहीं, गुरु कन्या के लिए पतिकारक होता है। इन दोनों ग्रहों का अस्त होना दांपत्य के लिए अशुभ माना गया है। इसलिए गुरु-शुक्र के अस्त होने की स्थिति में विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं होते। 


ढाई महीने बाद के विवाह मुहूर्त
जुलाई माह: 9, 11, 12, 13, 14, 15 जुलाई शामिल हैं। 
नवंबर माह: 12, 17, 18, 23, 25, 27 28 नवंबर। 
दिसंबर माह: 2, 3, 4, 6, 7, 10, 11, 14 दिसंबर। 

 

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