वेनेजुएला के बाद ग्रीनलैंड पर ट्रंप की नजर: क्या अमेरिका आर्कटिक में रचेगा नया शक्ति-संतुलन?

3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड पर टिक गई है। ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की इच्छा जाहिर की है और संकेत दिए हैं कि इसके लिए सैन्य विकल्प भी खुले हैं। व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि यह मुद्दा अमेरिका की “राष्ट्रीय सुरक्षा” से जुड़ा है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने कहा कि ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर अमेरिका से कोई टकराव नहीं कर सकता। उनके बयान को अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी और शक्ति-आधारित नीति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। वेनेजुएला में मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप का यह रुख और भी गंभीर माना जा रहा है।

ग्रीनलैंड डेनमार्क का सेमी-ऑटोनॉमस क्षेत्र है और आर्कटिक में इसकी रणनीतिक अहमियत बेहद ज्यादा है। यहां से अटलांटिक समुद्री मार्गों की निगरानी, मिसाइल डिटेक्शन सिस्टम, पिघलती बर्फ से खुलते नए शिपिंग रूट्स और तेल, गैस व दुर्लभ खनिजों तक पहुंच संभव है। यही वजह है कि चीन और रूस भी इस क्षेत्र में रुचि रखते हैं।

यूरोप ने ट्रंप के इरादों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट्टे फ्रेडरिकसेन ने साफ कहा कि “ग्रीनलैंड उसके लोगों का है।” फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन समेत कई यूरोपीय देशों ने संयुक्त बयान जारी कर ग्रीनलैंड की संप्रभुता का समर्थन किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका ने बल प्रयोग किया तो यह NATO और अमेरिका-यूरोप संबंधों के लिए घातक साबित हो सकता है।

हालांकि, ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने के लिए कांग्रेस, डेनमार्क और यूरोपीय संघ की मंजूरी जरूरी है और इसकी लागत सैकड़ों अरब डॉलर हो सकती है। फिलहाल कोई तात्कालिक सैन्य कार्रवाई नहीं दिखती, लेकिन ट्रंप की आक्रामक नीति ने दुनिया की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

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