ओमान में आज अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता, नाकामी पर मध्य पूर्व में जंग का खतरा गहराया!
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव आज एक अहम मोड़ पर पहुंच सकता है। दोनों देशों के प्रतिनिधि शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत करने जा रहे हैं। यह वार्ता ऐसे समय हो रही है, जब कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों के साथ-साथ इसके विफल होने पर युद्ध की आशंका भी गहराती जा रही है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि बातचीत सुबह 10 बजे शुरू होगी। पहले इस बैठक का स्थान इस्तांबुल तय किया गया था, लेकिन ईरान की मांग पर इसे ओमान स्थानांतरित कर दिया गया। ओमान इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय प्रारूप पर सहमति बनी है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जारेड कुशनेर शामिल हैं।
हालांकि बातचीत का मुख्य विषय ईरान का परमाणु कार्यक्रम है, लेकिन एजेंडे को लेकर दोनों पक्षों के बीच गहरे मतभेद बने हुए हैं। अमेरिका चाहता है कि वार्ता में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रॉक्सी ग्रुप्स जैसे हमास और हिजबुल्लाह, साथ ही मानवाधिकार मुद्दों को भी शामिल किया जाए। वहीं ईरान का कहना है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे प्रतिबंध हटाने तक सीमित रहनी चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कही है, लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि अगर वार्ता असफल रही तो सैन्य विकल्प खुले हैं। दूसरी ओर, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। अमेरिका ने अरब सागर में ईरानी ड्रोन को मार गिराया है और कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात किया है, जबकि ईरान ने भी बैलिस्टिक मिसाइलों की तैनाती की है।
इस वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। खाड़ी देश संभावित जवाबी हमलों को लेकर चिंतित हैं और क्षेत्रीय नेता संघर्ष टालने की अपील कर रहे हैं। अगर बातचीत नाकाम होती है, तो मध्य पूर्व में बड़े सैन्य टकराव का खतरा बढ़ सकता है।















































































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