जाने खाटूश्याम 'हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा' के बारे में एहम बात। 

राजस्थान के जिले में स्थित खाटूश्याम जी में हर रोज लाखों श्रद्धालु शीश नवाने के लिए आते हैं। बाबा शाम को ‘हारे का सहारा’ और ‘लखदातार’ कहा जाता है। कोरोना के बाद बाबा श्याम के दरबार में आने वाले भक्तों की संख्या में कई गुना तक बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में दिनों दिन बाबा श्याम की आस्था लोगों में बढ़ती जा रही है लेकिन क्या आपको पता है कि बाबा श्याम को भगवान कृष्ण का अवतार क्यों कहा जाता है और क्यों उन्हें कलयुग का देवता माना जाता है। क्या कारण है कि हजारों मीलों से दूर से भी भक्त उनकी ओर खींचे चला आता है। आज हम जिन्हें खाटू श्याम के नाम से जानते हैं, वो महाभारत के पांडवों में भीम के पोते और घटोत्कच के बेटे थे। इनका असली नाम बर्बरीक था। बर्बरीक में बचपन से ही वीर योद्धा के गुण थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को कलियुग में स्वयं के नाम से पूरे जाने का वरदान दिया था। इसलिए आज के समय में बर्बरीक को ही खाटू श्याम के रूप में पूजा जाता है। खाटू श्याम का एक नाम शीशदानी,तीन धाण धारी और मोरछीधारी भी है। 

महाभारतयुद्ध में हिस्सा लेने के लिए बर्बरीक ने अपनी मां से आज्ञा मांगी थी। लेकिन मां को लगा कि कौरवों की सेना अधिक होने के पांडवों को युद्ध जीतने में मुश्किल होगी। इसलिए उन्होंने बर्बरीक से वचन लिया कि,वह युद्ध में उसी पक्ष का साथ देंगे तो हार रहा होगा। बर्बरीक ने मां की आज्ञा मानकर वचन दिया कि, वह उसी पक्ष का साथ देंगे जो हार रहा होगा। इसलिए खाटू श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है। खाटू श्याम का अर्थ है, मं सैव्यम पराजित: यानी जो हारे और निराश लोगों को संबल प्रदान करता है। दानशीलता के कारण बर्बरीक ने बिना किसी सवाल के अपना शीश भगवान श्री कृष्ण को दान दे दिया। इसी दानशीलता के कारण श्री कृष्ण ने कहा कि तुम कलयुग में मेरे नाम से पूजे जाओगे, तुम्हें कलयुग में श्याम के नाम से पूजा जाएगा, तुम कलयुग का अवतार कहलाओगे और 'हारे का सहारा' बनोगे।  


 

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