वीर योद्धा मेवाड़ के महाराणा प्रताप के जीवन से जुडी कुछ बात, जाने इनका इतिहास और महत्व।
इस साल महाराणा प्रताप की 484वीं जयंती मनाई जाएगी। आज के दिन ही यानी 09 मई को महाराणा प्रताप का जन्म राजस्थान के मेवाड़ में हुआ था। हर साल देशभर में महाराणा प्रताप की जयंती धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाई जाती है। महाराणा प्रताप का जन्म 09 मई 1540 को राजस्थान के मेवाड़ में राजपूताना राजघराने में हुआ था। इनके पिता का नाम उदय सिंह द्वितीय और माता का नाम महारानी जयंवता बाई था। महाराणा प्रताप सभी भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। इन्होंने मुगलों द्वारा बार-बार हुए हमलों से मेवाड़ की रक्षा की। महाराणा प्रताप मेवाड़ के वीर योद्धा के साथ ही शौर्य, पराक्रम और साहस के लिए भी जाने जाते हैं। महाराणा प्रताप की अनंत कहानियां इतिहास के पन्नों पर अंकित है। उन्होंने अपनी आन, बान और शान के लिए कभी समझौता नहीं किया। विपरीत से विपरीत परिस्थिति ही क्यों ना, कभी हार नहीं मानी। यही वजह है कि महाराणा प्रताप की वीरता के आगे किसी की भी कहानी टिकती नहीं है।
1576 में हल्दी घाटी में महाराणा प्रताप और मुगल बादशाह अकबर के बीच युद्ध हुआ। महाराणा प्रताप ने अकबर की 85 हजार सैनिकों वाली विशाल सेना के सामने अपने 20 हजार सैनिक और सीमित संसाधनों के बल पर स्वतंत्रता के लिए कई वर्षों तक संघर्ष किया। बताते हैं कि ये युद्ध तीन घंटे से अधिक समय तक चला था। इस युद्ध में जख्मी होने के बावजूद महाराणा मुगलों के हाथ नहीं आए। महाराणा प्रताप के 11 रानियां थीं, जिनमें मे से अजबदे पंवार मुख्य महारानी थी और उनके 17 पुत्रों में से अमर सिंह महाराणा प्रताप के उत्तराधिकारी और मेवाड़ के 14वें महाराणा बने। महाराणा प्रताप का निधन 19 जनवरी 1597 को हुआ था। कहा जाता है कि इस महाराणा की मृत्यु पर अकबर की आंखें भी नम हो गई थीं।
















































































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