हिंदू धर्म में 'वैशाख पूर्णिमा' का विशेष महत्व और तिथी ?

वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को वैशाख पूर्णिमा कहते हैं और इसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं, क्योंकि भगवान बुद्ध का जन्म इसी दिन हुआ था। पूरा वैशाख महिना स्नान, दान, जप, तप, पूजा इत्यादि के लिए पवित्र माना जाता है, इसलिए वैशाख महीने की पूर्णिमा बेहद खास मानी जाती है। पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर गंगा स्नान करने से सभी प्रकार के कष्ट समाप्त हो जाते हैं और मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है। वैशाख पूर्णिमा के दिन जो व्यक्ति भगवान सत्यनारायण की पूजा करता है, उनकी कथा का पाठ करता है और भगवान को केले की फली, तुलसीदल आदि का भोग लगाता है, उसके परिवार में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है।

कब से शुरू हो रही पूर्णिमा तिथी 
वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 22 मई को संध्या 05 बजकर 42 मिनट से होने जा रही है। वहीं पूर्णिमा तिथि का समापन अगले दिन यानी 23 मई को 06 बजकर 42 मिनट तक रहने वाला है। उदया तिथि के अनुसार पूर्णिमा तिथि का व्रत 23 मई को ही रखा जाएगा। पूर्णिमा तिथि के दिन मृत्यु लोक के भद्रा का साया है लेकिन यह भद्रा का प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। क्योंकि भद्रा 23 मई को सुबह 06 बजकर 32 मिनट में ही समाप्त हो रही है। इसके बाद से आप पूजा पाठ स्नान दान आरंभ कर सकते हैं। 

वैशाख पूर्णिमा 2024 का महत्व
वैशाख पूर्णिमा  के दिन गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान-दान करने से पुण्यकारी लाभ मिलते हैं। वैशाख अमावस्या के दिन अपनी वस्त्र, धन, अन्न और फल का दान करने अति उत्तम माना जाता है। इसके अलावा इस दिन बर्तन, अनाज और सफेद वस्त्र का दान करना भी लाभकारी होता है।

 

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