सोम प्रदोष व्रत क्या है, जाने इसके 'शुभ मुहूर्त' और 'पूजा विधि' के साथ इन चीज़ो का दान करने से जातक विपदाओं से मिलेगा छुटकारा।
प्रदोष व्रत बेहद शुभ माना जाता है। यह भगवान शिव को समर्पित है। इस बार यह व्रत 20 मई दिन सोमवार को रखा जाएगा। सोमवार को पड़ने की वजह से इसे सोम प्रदोष के नाम से जाना जाता है। ज्योतिष की दृष्टि से सोम प्रदोष को बहुत खास माना जाता है। इस तिथि पर भोलेनाथ की विशेष पूजा करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा होती है। इस दिन भक्त व्रत रखते और शिव जी की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसा कहा जाता है, यह व्रत भोलेनाथ को अति प्रिय है। महीने में दो प्रदोष व्रत आते हैं। सोमवार को पड़ने की वजह से इसे सोम प्रदोष के नाम से जाना जाता है।ऐसे में जो लोग इस पवित्र दिन पर शाम के समय भगवान शंकर की पूजा विधि अनुसार करने के बाद, दीपदान करते हैं, उन्हें हर वो चीज प्राप्त होती है, जिसके वे इच्छुक होते हैं। प्रदोष दिवस हिंदू धर्म में एक शुभ दिन माना जाता है, जो भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष में कुल 24 प्रदोष व्रत आते हैं।
पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय ज्यादा फलदायी होती है। ऐसे में शाम 6 बजकर 30 मिनट से 8 बजकर 30 मिनट तक आप पूजा कर सकते हैं। इसके अलावा दोपहर की पूजा 12 बजे से 3 बजे तक की जा सकती है। हालांकि प्रदोष काल को भोलेनाथ की पूजा के लिए सबसे उत्तम समय माना गया है। ऐसे में इसी समय पूजा करने की कोशिश करें।
पूजा करने की विधि
सोम प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव को जल और बेल पत्र अर्पित करें। उन्हें सफेद वस्तु का भोग लगाएं. शिव मंत्र "नमः शिवाय" का जाप करें। रात्रि के समय भी शिवजी के समक्ष घी का दीपक जलाकर शिव मंत्र जप करें। इस दिन जलाहार और फलाहार ग्रहण करना उत्तम होगा। नमक व अनाज का सेवन न करे।
इन चीजों का करें दान
सभी व्रत में दान करने का विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत के दिन श्रद्धा अनुसार गरीबों को धन, अन्न और वस्त्र का दान करें। मान्यता है कि दान करने से जातक को सभी विपदाओं से छुटकारा मिलता है।
















































































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