जाने जून में पड़ने वाले दोनों प्रदोष व्रत की डेट और शुभ मुहूर्त के बारे में खास बात।
पंचांग के अनुसार प्रदोष काल में पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन भोलेनाथ की पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान से महादेव की पूजा करने से मन की हर मनोकामना पूरी होती है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही घर में सुख-शांति बनी रहती है। अब जून का महीना शुरू होने वाला है। ऐसे में आइए जानते हैं कि जून में पड़ने वाले दोनों प्रदोष व्रत की डेट और शुभ मुहूर्त के बारे में और भी इससे जुडी कुछ खास और अहम बात।
जून माह का पहला प्रदोष व्रत
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 04 जून को रात 12 बजकर 18 मिनट पर होगी और इसका समापन अगले दिन यानी 04 जून को रात 10 बजकर 01 मिनट पर होगा। ऐसे में प्रदोष व्रत 04 जून को रखा जाएगा।
जून का दूसरा प्रदोष व्रत
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 19 जून को सुबह 07 बजकर 28 मिनट से होगा और इसके अगले दिन यानी 20 जून को सुबह 07 बजकर 49 मिनट पर तिथि का समापन होगा। ऐसे में 20 जून को प्रदोष व्रत किया जाएगा।
प्रदोष व्रत का महत्व
ऐसा माना जाता है कि इस शुभ दिन पर समर्पण और भक्ति के साथ भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करने से भक्तों की मनचाही इच्छाएं पूर्ण होती हैं। इसके साथ ही जीवन में सौभाग्य, समृद्धि और खुशहाली आती है। वहीं इस दिन कुछ भक्त भगवान शिव की पूजा भगवान नटराज के रूप में भी करते हैं।
प्रदोष व्रत पूजा विधि
प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत हो जाएं। इसके बाद भगवान शिव को पंचामृत से स्नान करवाएं। साथ ही शिव परिवार का भी पूजन करें। इसके बाद शिव जी को बेल पत्र, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य आदि अर्पित करें। अंत में आरती करें व शिव जी के मंत्रों और शिव चालीसा का भी पाठ करें। प्रदोष काल में पुनः स्नान करके, शुभ मुहूर्त में शिव जी की विधि-विधावपूर्वक पूजा-अर्चना करें। इसके बाद अपना उपवास खोलें।
















































































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