कब मनाई जाएगी बकरीद? साथ ही जाने इसके खास महत्व। 

बकरीद" जिसे "ईद-उल-अज़हा" भी कहा जाता है, एक इस्लामी त्योहार है जो मुसलमान समुदाय में मनाया जाता है। यह त्योहार प्रति वर्ष ईस्लामी हिजरी कैलेंडर के जुल हफ्ते की दसवीं और आखरी दिनों में मनाया जाता है। बकरीद का मतलब होता है "बकरों की ईद"। यह त्योहार बराबरी, दानशीलता, और सामाजिक एकता के संदेश के साथ मनाया जाता है। बकरीद पर मुसलमान अपने घरों में बकरे और बकरियों को कुर्बानी के लिए तैयार करते हैं। इस त्योहार का मुख्य उद्देश्य अल्लाह की खुशनुमाइश और उसकी राह में सेवा करना है। कुर्बानी के बाद, खाने की एक भोज तैयार की जाती है, जिसमें कई लोकप्रिय और स्वादिष्ट व्यंजन शामिल होते हैं। यह त्योहार खुशहाली, आत्मा संगीत, और सामाजिक उत्साह के साथ मनाया जाता है, जिससे लोग एक-दूसरे के साथ बंधन बनाते हैं और प्रेम और समर्थन का संदेश प्रसारित करते हैं।

इस साल बकरीद का त्यौहार 17 जून 2024 को मनाया जाएगा। चांदनी चौक स्थित फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने शनिवार को भाषा से बताया,  दिल्ली के आसमान में शुक्रवार शाम बादल छाए रहने की वजह से चांद के दीदार नहीं हो सके। लेकिन देर रात गुजरात, तेलंगाना के हैदराबाद और तमिलनाडु के चेन्नई से इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने 'ज़ुल हिज्जा' का चांद दिखने की पुष्टि हो गई। लिहाजा ईद-उल-अजहा का त्यौहार 17 जून को मनाया जाएगा। मुकर्रम अहमद ने कहा,  'ईद उल फित्र के विपरीत बकरीद का त्यौहार चांद दिखने के 10वें दिन मनाया जाता है, इसलिए फौरन ऐलान करने की कोई तात्कालिकता नहीं थी और अलग-अलग जगहों से चांद नजर आने की पुष्टि होने का इंतजार किया गया।' इस्लामी कैलेंडर में 29 या 30 दिन होते हैं जो चांद दिखने पर निर्भर करते हैं। ईद उल ज़ुहा या अजहा या बकरीद, ईद उल फित्र के दो महीने नौ दिन बाद मनाई जाती है। जामा मस्जिद के पूर्व शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने भी 17 जून को बकरीद का त्यौहार मनाए जाने की घोषणा की।

 

 

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